बिहार में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना से छात्रों का पलायन रुका : उपमुख्यमंत्री चौधरी

बिहार में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना से छात्रों का पलायन रुका : उपमुख्यमंत्री चौधरी

बिहार में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना से छात्रों का पलायन रुका :  उपमुख्यमंत्री चौधरी
Modified Date: April 29, 2026 / 05:44 pm IST
Published Date: April 29, 2026 5:44 pm IST

पटना, 29 अप्रैल (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को दावा किया कि राज्य में सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की स्थापना से अन्य राज्यों में छात्रों के पलायन में काफी कमी आई है और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हुई है।

चौधरी ने बिहार सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

विभाग के प्रभारी मंत्री चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ‘सात निश्चय-1’ कार्यक्रम के तहत बिहार के प्रत्येक जिले में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित करने की परिवर्तनकारी नीति शुरू की गई थी। इससे छात्रों को राज्य के भीतर रोजगार पाने में मदद मिली और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ी।’’

उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी नीतीश कुमार की नीतियों पर काम कर रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक बिहार के सभी जिलों में 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और 46 पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सात निश्चय-2 कार्यक्रम के तहत विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कई उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं, जो छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद कर रहे हैं।’’

चौधरी ने दावा किया कि राज्य के सभी क्षेत्रों से छात्र-छात्राएं इन उत्कृष्टता केंद्रों में अध्ययन कर रहे हैं जो ‘‘समावेशी विकास का प्रतीक’’ है।

विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14,553 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 17,243 सीटें उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन दर 81 प्रतिशत और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 93 प्रतिशत से अधिक है।’’

सिंह ने जुलाई 2025 से मार्च 2026 की अवधि के ‘प्लेसमेंट’ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 4,745 इंजीनियरिंग और 10,501 पॉलिटेक्निक छात्रों को नौकरी मिली, जिनमें कुछ छात्रों को 20 से 30 लाख रुपये वार्षिक पैकेज भी प्राप्त हुए।

उत्कृष्टता केंद्रों के संबंध में सचिव ने कहा कि इन्हें शुरुआत में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर तैयार किया गया था, लेकिन अब इन्हें ‘हब’ मॉडल में परिवर्तित किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन संस्थानों के स्थायी शिक्षकों ने उन्नत पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए आईआईटी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्हें विषय विशेष पढ़ाने की योग्यता साबित करने के लिए परीक्षा भी देनी पड़ी। स्थायी शिक्षकों के अलावा आईआईटी की टीम ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करती है और तृतीय पक्ष मूल्यांकन भी करती है।’’

सिंह ने बताया कि उत्कृष्टता केंद्रों में शिक्षकों के लिए नियुक्त ऑन-साइट प्रशिक्षक आधुनिक और अधिक मांग वाली शाखाओं जैसे कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में प्रशिक्षण दे रहे हैं।

भाषा

कैलाश रवि कांत


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