बक्सर, पांच सितंबर (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि का नवीनीकरण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भारत, विशेषकर बिहार के हित में नहीं है।
दोनों देशों के बीच ‘‘फरक्का जल बंटवारा संधि’’ के नाम से भी जानी जाने वाले इस समझौते की 30 वर्ष की अवधि दिसंबर में समाप्त हो रही है।
झा ने यहां ‘नीतीश संवाद यात्रा’ के शुभारंभ के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। यह यात्रा गंगा किनारे स्थित 12 जिलों से होकर गुजरेगी और कटिहार में समाप्त होगी।
राज्यसभा सदस्य झा ने कहा, ‘‘यह संधि भारत, विशेषकर बिहार के हित में नहीं है और मौजूदा स्वरूप में इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। अगर नई संधि होती है तो भी 2050 तक राज्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।’’
उन्होंने दावा किया कि इस समझौते का बिहार के जल प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुष्क मौसम में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह घटकर करीब 400 घन मीटर प्रति सेकंड रह जाता है, तब बांग्लादेश के लिए फरक्का से 1,500 घन मीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ना पड़ता है।
झा ने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि न केवल गंगा का पानी, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों का पानी भी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है। इससे बिहार अपने हिस्से के पानी से सीधे वंचित हो रहा है।’’
राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दल जदयू के नेता ने आरोप लगाया कि संधि पर हस्ताक्षर के समय बिहार और केंद्र में रही सरकारों ने ‘‘बिहार के हितों का बलिदान’’ किया और किसानों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक जरूरतों, लाखों लोगों की आजीविका तथा राज्य के युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में नहीं रखा।
संधि पर हस्ताक्षर के समय लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे, जबकि संयुक्त मोर्चा सरकार में एच डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे।
फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में हुआ था, जबकि दोनों देशों के बीच संधि पर 1996 में हस्ताक्षर किए गए थे।
झा ने पिछले महीने भी इसी मांग को दोहराते हुए कहा था कि इतनी महत्वपूर्ण संधि को उसके प्रभावों का आकलन किए बिना केवल 30 वर्षों के लिए जारी नहीं रहने देना चाहिए।
भाषा अमित माधव
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