सरकारी तंत्र ने सामंती ताकतों की जगह ली है, हमारे उम्मीदवारों को निशाना बनाया जा रहा है: दीपांकर

सरकारी तंत्र ने सामंती ताकतों की जगह ली है, हमारे उम्मीदवारों को निशाना बनाया जा रहा है: दीपांकर

सरकारी तंत्र ने सामंती ताकतों की जगह ली है, हमारे उम्मीदवारों को निशाना बनाया जा रहा है: दीपांकर
Modified Date: October 18, 2025 / 08:39 pm IST
Published Date: October 18, 2025 8:39 pm IST

पटना, 18 अक्टूबर(भाषा) भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र अब सामंती ताकतों की तरह काम कर रहा है और पार्टी के उम्मीदवारों को फर्जी मामलों में फंसाकर निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पार्टी को भोरे सीट से अपने उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को इसलिए बदलना पड़ा क्योंकि उन्हें ‘झूठे’ मामले में फंसा दिया गया था, जबकि पिछले चुनाव में वह मात्र 400 वोट से हार गए थे।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘पहले हमारे खिलाफ स्थानीय सामंती ताकतें हिंसा का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन अब पूरा राज्य तंत्र हमें फंसाने में लगा है।’’

उन्होंने बताया कि भाकपा (माले) लिबरेशन ने शनिवार को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 20 उम्मीदवारों की सूची जारी की। हालांकि महागठबंधन की ओर से सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है।

पार्टी महासचिव ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘हम और अधिक सीटों पर लड़ना चाहते थे, लेकिन इस बार महागठबंधन में कई दल हैं, इसलिए हमने 20 सीटों पर ही समझौता किया।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन सभी सीटों पर ‘दोस्ताना मुकाबला’ टालने की कोशिश की है, जहां से वह चुनाव लड़ रही है।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘इन 20 सीटों में से 18 वे सीटें हैं, जिन पर हमने पिछली बार भी चुनाव लड़ा था। दो नई सीटें हैं जिनमें एक राजगीर (नालंदा) की आरक्षित सीट है और दूसरी सुपौल जिले की पिपरा सीट है, जो कोसी क्षेत्र में है।’’

पार्टी ने राजगीर से विश्वनाथ चौधरी और पिपरा से अनिल कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘भोरे सीट पर हमें उम्मीदवार बदलना पड़ा। जितेंद्र पासवान पिछले चुनाव में मात्र 400 वोटों से हारे थे और तभी से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा था। नामांकन दाखिल करते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कई संकेत थे कि उन्हें जीतने नहीं दिया जाएगा।’’

उन्होंने बताया कि अब भोरे सीट से जवाहरलाल नेहरू विश्विद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, पार्टी के डुमरांव से विधायक सत्यदेव राम को भी नामांकन के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘सत्यदेव जी को 2005 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया, जिसमें उन पर ट्रेन रोकने का आरोप था। पहले भी हमें परेशान किया गया है, लेकिन अब यह सिर्फ उत्पीड़न नहीं, बल्कि गंभीर उत्पीड़न है।’’

उन्होंने कहा,‘‘1995 के चुनाव में हमें भोरे सीट पहली बार 15 हजार से अधिक वोट मिले थे और 1997 में जब चंद्रशेखर की हत्या हुई, उसी समय उमेश पासवान की भी हत्या कर दी गई थी। तब यह काम स्थानीय सामंती ताकतें करती थीं, अब राज्य तंत्र कर रहा है।’’

भट्टाचार्य ने कहा कि अगिआंव से विधायक रहे मनोज मंजिल को भी झूठे मामले में फंसा कर अयोग्य घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘यह सब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा संगठित तरीके से किया जा रहा है।’’

उन्होंने अफसोस जताया कि पार्टी इस बार केवल एक महिला उम्मीदवार को ही उतार पाई है, लेकिन विश्वास जताया कि पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव मामूली अंतर से हार चुकी दिव्या गौतम इस बार अच्छा प्रदर्शन करेंगी।

भाकपा (माले) लिबरेशन ने अपने सभी मौजूदा विधायकों को दोबारा उम्मीदवार बनाया है और उनके कार्यकाल की ‘‘रिपोर्ट कार्ड’’ भी जारी की है, ताकि ‘‘पारदर्शिता और जवाबदेही’’ जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखा जा सके।

भाकपा (माले) लिबरेशन महागठबंधन (विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ) की सहयोगी पार्टी है। पिछली विधानसभा में उसने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 12 पर जीत दर्ज की थी।

भाषा कैलाश नोमान

नोमान


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