पटना, 23 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को बिहार में वंचित जातियों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण बहाल कराने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। यह आरक्षण नीतीश कुमार सरकार ने लागू किया था, लेकिन अदालत ने इसे रद्द कर दिया था।
भाजपा के सहयोगी कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी ने शनिवार को राजगीर में संपन्न हुए तीन-दिवसीय संगठनात्मक सम्मेलन ‘विमर्श शिविर 2026’ में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया।
राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘हमने अपने तीन-दिवसीय संगठनात्मक सम्मेलन में पिछड़े वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रस्ताव पारित किया। नीतीश कुमार के कार्यकाल में जातीय सर्वेक्षण के बाद आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने 50 प्रतिशत की सीमा का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया।’’
बिहार में महागठबंधन की सरकार के दौरान 2022 में आरक्षण को बढ़ाकर 65 प्रतिशत किया गया था। उस समय महागठबंधन में जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दल शामिल थे। इससे आरक्षण पर उच्चतम न्यायालय द्वारा तय 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन हुआ था।
इसके बाद पटना उच्च न्यायालय ने बढ़े हुए आरक्षण को रद्द कर दिया। राज्य सरकार की इसके खिलाफ अपील उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
अब राजग में वापस आ चुके जद(यू) को राजद और अन्य दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। इन दलों का आरोप है कि जद(यू) ने बढ़े हुए आरक्षण का प्रावधान करने वाले कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया। नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण मिलता है।
कुशवाहा ने हाल में दिए अपने उस बयान को लेकर हुए विवाद को भी कमतर करने की कोशिश की, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरएलएम, जद(यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार की विरासत का ‘सच्चा दावेदार’ है। नीतीश कुमार इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री पद से हट गए थे।
जद(यू) के कुछ नेताओं की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए कुशवाहा ने कहा कि उनके बयान का ‘गलत अर्थ निकाला गया’। उन्होंने कहा, ‘‘यह सत्ता हासिल करने की बात नहीं है। यह हमारे पूर्वजों के विचारों को आगे बढ़ाने की हमारी साझा जिम्मेदारी है।’’
कुशवाहा कोइरी जाति से आते हैं, जबकि नीतीश कुमार कुर्मी समुदाय से हैं। बिहार के राजनीतिक शब्दकोष में इन दोनों समुदायों को ‘लव-कुश’ कहा जाता है।
कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्री हैं और नीतीश कुमार के बेटे निशांत के मंत्रिमंडल सहयोगी हैं।
कुशवाहा ने इस धारणा को खारिज किया कि नीतीश कुमार के बेटे को अधिक राजनीतिक तवज्जो मिलने से वह असहज हैं। कुशवाहा ने कहा, ‘‘मेरी नजर में दोनों बराबर हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बहुत से लोग यह भूल जाते हैं कि उपेंद्र कुशवाहा ही थे, जिन्होंने सबसे पहले निशांत के राजनीति में आने की वकालत की थी।’’
भाषा संतोष सुरेश
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