मोदी और नीतीश की सरकारों ने सूचना का अधिकार कानून को कुचल दिया : कांग्रेस
मोदी और नीतीश की सरकारों ने सूचना का अधिकार कानून को कुचल दिया : कांग्रेस
पटना, 12 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी और बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की आत्मा को कुचल दिया।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा कि आरटीआई कानून नागरिकों के संवैधानिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम था, जिसे संगठित रूप से पंगु बनाया जा रहा है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दुबे ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के नेतृत्व में पारित हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकों को सरकारी तंत्र से जवाब मांगने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की ताकत देता है।
दुबे ने कहा कि आरटीआई के माध्यम से देश के लाखों नागरिकों ने अपने हक जैसे राशन, पेंशन, मजदूरी, छात्रवृत्ति और योजनाओं का लाभ हासिल किया लेकिन पिछले एक दशक में, खासतौर पर मोदी–नीतीश सरकार के दौरान, इस कानून के प्रभाव को खत्म करने की कोशिश की गई है।
अभय दुबे ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने अपने अधिकार-आधारित एजेंडे के तहत कई ऐतिहासिक कानून लागू किए, जिनमें मनरेगा (2005), वन अधिकार अधिनियम (2006), शिक्षा का अधिकार (2009), भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवज़ा कानून (2013) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) शामिल हैं।
इसी क्रम में सूचना का अधिकार अधिनियम भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बना, जिसने सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया।
उन्होंने कहा कि बिहार में सूचना आयोग की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
दुबे ने कहा आरटीआई अधिनियम की धारा 25 के अनुसार आयोग को हर वर्ष अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करनी चाहिए, लेकिन 2017–18 के बाद कोई वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं हुई है।
सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में 25,000 से अधिक अपील और शिकायतें लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि आयोग ने बड़ी संख्या में अपील और शिकायतें वापस कर दी हैं, जबकि उसी अवधि में अपेक्षाकृत कम शिकायतें दर्ज हुईं।
भाषा कैलाश जोहेब
जोहेब

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