शराबबंदी पर दुविधा में नीतीश सरकार,चुनावी वादों के लिए लिए गए कर्ज चुकाने को चाहिए राजस्व:किशोर

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शराबबंदी पर दुविधा में नीतीश सरकार,चुनावी वादों के लिए लिए गए कर्ज चुकाने को चाहिए राजस्व:किशोर

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 10:15 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

समस्तीपुर, 26 फरवरी (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि बिहार में नीतीश कुमार सरकार इस दुविधा में है कि वह अपने चुनावी वादे के अनुरूप शराबबंदी जारी रखे या राजस्व बढ़ाने के लिए कानून वापस ले।

किशोर ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को पैसे बांटने के लिए सरकार ने कर्ज लिया था, जिसके कारण सरकारी खजाना खाली हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब वह पिछले दरवाजे से शराबबंदी हटाकर राजस्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि वह शराबबंदी कानून को वापस लेने का फैसला करती है, तो एक तरह से वह यह स्वीकार करेगी कि जन सुराज जो कह रहा था, वह सही था। जन सुराज पहली पार्टी थी जिसने कहा था कि शराबबंदी का यह फर्जी कानून लोगों के हित में नहीं है।’’

किशोर ने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी कि यदि शराबबंदी वास्तव में लोगों के हित में है तो उसे पूरे देश में लागू किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि इससे किसी का भला नहीं हो रहा।’’

किशोर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर समेत विभिन्न वर्गों से एक दशक पुराने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की समीक्षा की मांग उठ रही है।

विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में भाजपा विधायक विनय बिहारी ने कहा कि राज्य सरकार को गुजरात या महाराष्ट्र की शराब नीति का अनुसरण करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात बिहार की तरह शुष्क राज्य है, लेकिन वहां स्थापित परमिट प्रणाली और कुछ विशेष आर्थिक छूट के कारण नीति अधिक लचीली मानी जाती है।’’

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीते हुए या उसके प्रभाव में पाए जाने पर लोगों पर जुर्माना लगाया जाता है तथा शराब कारोबारियों पर भी जुर्माना लगाया जाता है, जिससे राजस्व में वृद्धि होती है।

विधायक ने यह भी कहा कि बुलडोजर से शराब की बोतलें कुचलने और शराब को जमीन में दफनाने की पर्यावरणीय लागत भी है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे किसे लाभ होता है? इससे मिट्टी की सेहत और पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है।’’

भाषा कैलाश

राजकुमार

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