बेगूसराय, छह फरवरी (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने बेगूसराय जिले में एक मुसहर बस्ती को हटाने की कार्रवाई पर शुक्रवार को अगले आदेश तक रोक लगा दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति नानी टागिया की पीठ ने जयमंगला गढ़ स्थित मुसहर बस्ती के निवासियों सरोज देवी, काला देवी और धनिक सदा की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया।
मुसहर समुदाय को राज्य के सबसे वंचित महादलित समूहों में गिना जाता है।
बस्ती के निवासियों की ओर से पेश अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने हस्तक्षेप याचिका इसलिए दायर की क्योंकि बस्ती के लोग अतिक्रमणकारी नहीं हैं। वे ‘बासगीत पर्चा’ धारक हैं, जो 1947 के काश्तकारी अधिनियम के तहत जारी किए गए थे।’’
‘बासगीत पर्चा’भूमिहीन परिवारों को सरकार द्वारा प्रदान किया गया एक कानूनी दस्तावेज़ है, जिसके तहत उन्हें घर बनाने के लिए सरकारी या रैयती भूमि का इस्तेमाल करने का धिकार मिलता है।
मालवीय ने बताया कि ये लोग इंदिरा गांधी आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी भी रहे हैं तथा क्षेत्र में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग करते हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी हस्तक्षेप याचिका स्वीकार होने के बाद हम अब मामले में पक्षकार बन गए हैं और अंचलाधिकारी की ओर से जारी बेदखली नोटिस पर रोक लगा दी गई है।’’
मालवीय के मुताबिक निवासियों को दो जनवरी को जानकारी दी गई थी कि कॉलोनी हटाई जाएगी और चेरिया बरियारपुर अंचल कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में बस्ती को “अतिक्रमण” बताया गया था।
मालवीय ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय ने 2017 से 2021 के बीच जलाशयों की संख्या में वृद्धि को लेकर इसरो और स्पेस एटलस के मानचित्रण के आधार पर आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए स्वत: संज्ञान लिया था।
उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने अतिक्रमण और निर्माण संबंधी मुद्दों को लेकर अंतरिम आवेदन दायर किए थे। अदालत ने कहा था कि यदि सत्यापन में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो अतिक्रमणकारियों को हटाया जाए।”
उन्होंने बताया कि अदालत के इसी आदेश के संदर्भ में दायर हमारी हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार करते हुए मामले में पक्षकार बनाया है।
प्रस्तावित इको-पार्क परियोजना के लिए भूमि खाली कराने की स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई के बाद यह बस्ती विवाद के केंद्र में आ गई थी।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने अदालत के रुख को वंचित महादलितों के पक्ष में “मानवीय फैसला” बताया।
पद्मश्री सम्मानित सुधा वर्गीज ने इस अभियान को महात्मा गांधी की ‘अंतिम पंक्ति के व्यक्ति’ की अवधारणा पर आधारित अधिकारों की लड़ाई बताया।
मालवीय ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
भाषा कैलाश धीरज
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