बिहार के लोगों की राजनीतिक बंधुआ मजदूरी खत्म होने की तारीख तय हो गई: प्रशांत किशोर
बिहार के लोगों की राजनीतिक बंधुआ मजदूरी खत्म होने की तारीख तय हो गई: प्रशांत किशोर
पटना, छह अक्टूबर (भाषा) जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही ‘राज्य के लोगों की राजनीतिक बंधुआ मजदूरी खत्म होने की तारीख तय हो गई है’।
उन्होंने दावा किया कि इस बार बिहार के लोग किसी दल या नेता के लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वोट करेंगे।
किशोर ने निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा चुनावों की घोषणा किये जाने के बाद पत्रकारों से कहा, “पिछली बार दोनों गठबंधनों को मिलाकर 72 प्रतिशत मतदान हुआ था। शेष 28 प्रतिशत वोट इस बार जन सुराज को मिलेगा। अगर दोनों गठबंधनों को 10-10 प्रतिशत का नुकसान होता है, तो वे वोट जन सुराज में जुड़ जाएगा और हमारा वोट प्रतिशत 48 हो जाएगा।”
उन्होंने कहा, “हमें ‘वोटकटवा पार्टी’ कहा गया है लेकिन हम इसे अपने लिए एक मेडल मानते हैं। हम दोनों गठबंधनों का इतना वोट काटेंगे कि वे साफ हो जाएंगे।” किशोर ने दो चरणों में चुनाव कराने के आयोग के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, “यह बहुत अच्छा निर्णय है। पहले अधिक चरणों में चुनाव इसलिए कराए जाते थे ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अधिक सभाएं कर सकें। लेकिन अब भाजपा भी समझ चुकी है कि मोदीजी की सभाओं से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला इसलिए जल्दी चुनाव निपटाने का फैसला किया गया है।”
उन्होंने कहा, “आज बिहार के लोगों की बंधुआ मजदूरी खत्म होने की तारीख घोषित हुई है। अब बिहार के लोग मोदी-नीतीश या लालू के लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वोट करेंगे। हमारा सपना है कि बिहार ऐसा राज्य बने, जहां उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के लोग भी पढ़ाई और रोजगार के लिए आएं।” किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा, “नीतीश कुमार ने हाल में पटना मेट्रो का उद्घाटन किया है। यह उनका अंतिम उद्घाटन था। हमने पहले ही कहा था कि अगली बार वे मुख्यमंत्री आवास ‘अणे मार्ग’ पर दही-चूड़ा नहीं खाएंगे।” इससे पहले, जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने भी चुनाव की घोषणा का स्वागत किया और कहा, “इस बार चुनाव दिवाली और छठ के बाद होंगे। त्योहार के दौरान बाहर से जो लोग अपने घर लौटेंगे, वे बिहार में बदलाव के लिए मतदान करेंगे।”
भाषा कैलाश जितेंद्र
जितेंद्र

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