NindakNiyare: एथनॉल पर चल रहे भ्रम, भय और सच के साथ ही एक उपाय और करे सरकार
बरुण सखाजी श्रीवास्तव एथनॉल ब्लेंडिंग का मसला जोर पकड़ चुका है। गाड़ी व्यक्ति की संपत्ति होती है। उससे जुड़ी कोई भी अफवाह ही क्यों न हो, इट मैटर्स। यही हो …
बरुण सखाजी श्रीवास्तव
एथनॉल ब्लेंडिंग का मसला जोर पकड़ चुका है। गाड़ी व्यक्ति की संपत्ति होती है। उससे जुड़ी कोई भी अफवाह ही क्यों न हो, इट मैटर्स। यही हो रहा है। हर किसी को डर लग रहा। हर कोई चिंतित है। सोशल मीडिया पर धुंध है। जमीन में गहरे गड़े सच को खोदने, खोजने की फुरसत किसी को नहीं। सरकार के सामने यूपी जैसे राजनीतिक असरदार राज्य में चुनाव हैं। हर कोई चाहता है एथनॉल, चंदाचोरी या कोई भी मसला पकड़ में आए छोड़ना नहीं। सच क्या है, कैसा है इसकी परवाह बाद में की जाएगी। अभी तो पिल पड़ना है।
ऐसे भ्रम और धुंध में सरकार क्लेरिटी दे रही है। बावजूद इसके पैनिक बढ़ रहा है। एथनॉल ब्लेंडिंग ऑल ऑव सडन टपका कोई उल्का पिंड नहीं है। सरकार के पास जनविश्वास की कमी नहीं है। लोगों को लगता है मोदी है तो मुमकिन है, लेकिन यह दिखना भी चाहिए। दिखेगा नहीं तो एक दिन लगेगा भी नहीं। फिर यह इकलौता मसला नहीं है। आने वाले दिनों में मसलों की बाढ़ आने वाली है। चुनावी तैयारियों के बीच गैरजिम्मेदाराना सियासत करने के लिए कुख्यात भारत के राजनीतिक दल सरकार में अलग चरित्र निभाते हैं और विपक्ष में अलग। भाजपा भी इससे अछूती नहीं। आज भाजपा विपक्ष में होती तो जो भी दल सत्ता में होता उसके लिए ऐसी मुसीबतें खड़ी कर डालती जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
एथनॉल मैटर पाइलप हो रहा है। सपोज कीजिए, आपकी गाड़ी नई की नई हो और अचानक बंद हो जाए। आप शोरूम फोन करेंगे। वे रोड साइड असिस्टेंट को भेजकर गाड़ी उठवा लेंगे। वक्त जो लगेगा सो लगेगा, लेकिन आपके लिए यह एक स्थायी रूप से पैनिक हो गया। थोड़ी देर बाद ही आप सुनते हैं आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार के साथ भी ऐसा ही हुआ। तब तो आप यकीन करेंगे ई-20 में कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में सरकार पर भरोसा जताने वाले भी एक वक्त के बाद भरोसा छोड़ने लगेंगे।
इस तरह की स्थिति से बचने के लिए सरकार को चाहिए इमिजिएट पेट्रोल पंप्स को एक तीसरा विकल्प देने के लिए कहें। एक विकल्प ई-20, दूसरा विकल्प प्रीमीयम पेट्रोल का है ही और अब तीसरा विकल्प रेगुलर पेट्रोल का भी जुड़वाएं। बेशक यह कठिन है, संसाधनों की अधिक मात्रा चाहिए, लेकिन करना होगा। इससे पहला फायदा लोगों के पास विकल्प होगा। दूसरा फायदा मैकेनिक बिरादरी जो नरेटिव सेट करने में इस्तेमाल हो रही है वह नहीं हो पाएगी। तीसरा फायदा शोरूम, सर्विस प्रोवाइडर्स, बीमा कंपनियां जिसे आधार बनाकर कल को ग्राहक के सामने परेशानी खड़ी कर सकती हैं, वह नहीं कर पाएंगी। चौथा फायदा लोगों के पास सुस्पष्ट तुलनात्मक आंकड़े होंगे। इससे लोग जिस बात को लेकर परेशान हैं उससे मुक्त हो जाएंगे। एक काम सरकार यह भी करे कि ई-20 पेट्रोल की कीमत में कुछ कमी कर दे। इसे प्रमोट करने के लिए कुछ और उपाय करे। फिर एक्सपर्ट्स की फौज उतार दे, लोगों को समझ आ जाएगा और सब ठीक हो जाएगा। मैं भरोसे के साथ कहता हूं ई-20 में कुछ भी गड़बड़ नहीं है, लेकिन इस भरोसे को प्रूफ करने के लिए मुझे पंप पर तीसरा विकल्प चाहिए।
Web Title: Ethanol issue needed another option at petrol pumps
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