rss-meeting in raipur 15 subjects will change india political face

IBC Open Window: संघ की रायपुर में हुई बैठक के In-Sights, 15 ऐसे विषयों पर चर्चा जिनसे बदल सकती है पूरे भारतीय समाज की सूरत

RSS coordination meeting in raipur: संघ की 3 दिवसीय औपचारिक और 4 दिवसीय अनौपचारिक बैठक में समाज, राजनीति, धर्म आदि के 15 विषयों पर बात की गई। पढ़िए बरुण सखाजी का विश्लेषण...

Edited By: , September 12, 2022 / 08:29 PM IST

बरुण सखाजी, एसोसिएट एक्जेक्यूटिव एडिटर

RSS coordination meeting in raipur: संघ की 3 दिनी बैठक में किन बिंदुओं पर चर्चा हुई यह मैंने आपको पिछले वीडियो में बताया था। संघ ने अपनी पीसी में उन्हीं बिंदुओं पर बात की। यानी आईबीसी-24 ने सबसे पहले 10 बिंदू पर संघ की बैठक का सार लेकर आया था। अब हम आपको बताने जा रहे हैं वे 15 विषय जिन पर संघ की इस बैठक में चर्चा हुई और कुछ फैसले लिए गए।

नई शिक्षा नीति

संघ की बैठक में महत्वपूर्ण विषय नई शिक्षा नीति-2020 रही। संघ नए एक राय से कहा, इसमें भारतीयता का समावेष है। इसके अमल के लिए संघ को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अगर हम इसके अमल करवाने वालों को तैयार नहीं कर पाए तो यह एक कोरा दस्तावेज बनकर रह जाएगा। इसलिए समाज और व्यवस्था के बीच सेतु बनकर ऐसे लोगों को तैयार करना चाहिए, जो इसकी भावना को समझते हों। ऐसे शिक्षाविदों और शिक्षकों को चिन्हित करना चाहिए जो भारतीयता को प्रेरणा मानकर अपनी हर शिक्षा में इसका समावेष करते हैं। संघ ने यहां कुछ उदाहरण भी दिए, जो इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चित हैं।

ग्रामीण जीवन व रोजगार

संघ की इस बैठक में ग्रामीण जीवन और रीति-नीति पर बात हुई। संघ ने कहा, हमे सरकारों के ऐसे कार्यों को देखना चाहिए जो गांव को आत्मा से गांव और भौतिक सुविधाओं से आधुनिक बनाते हों। नगरीकरण की गति बीते कुछ दशकों में घटी है, लेकिन यह थमी नहीं है। गांवों का विघटित होना सामाजिक असंतुलन पैदा करेगा। इसलिए हम सबको मिलकर समाज में गांवों के प्रति सकारात्मक नजरिया बनाना चाहिए। लेकिन यह कोरा नजरिया नहीं हो, बल्कि गांवों में आजीविका के संसाधन भी पर्याप्त हों।

वर्ष 2022 और 2023 के चुनावी राज्य

संघ ने कहा, वर्ष 2022 और 2023 में देश के 11 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें से कई राज्यों में त्रिस्तरीय पंचायतों, निकायों के भी चुनाव होंगे। इनमें गुजरात, हिमाचल, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों के अलावा पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं। इन चुनावों में अनुमानित 42 करोड़ की आबादी के लिए शासन व्यवस्था चुनी जाएगी। इनमें लगभग 25 करोड़ मतदाता भाग लेंगे। हमें यह मानना चाहिए कि यह 2024 के आम चुनावों का आधार बनेगा। इन राज्यों में 146 लोकसभा सीटें आती हैं। संघ ने विमर्श में माना कि अभी देश गैर संघी विचारों के हाथ में जाना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। इसलिए अभी हमें भारतीय विचारों के सम्मान वाले दलों के लिए काम करना होगा। इन 11 राज्यों में 146 में से 117 सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि 2 सीटें उसके सहयोगियों के पास हैं। इन राज्यों में 1311 विधानसभा सीटें आती हैं। इसलिए यह अहम है।

अहिंदी राज्यों में विस्तार

संघ में अहिंदी राज्यों में विस्तार और विचार प्रचार पर चर्चा हुई। इनमें तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, तमिल, केरल समेत सभी हिंदी राज्य शामिल हैं।

धर्मांतरण

इस पर संघ की इस बैठक में लंबी चर्चा हुई। इसे लेकर केंद्र की सरकार की ओर से किए जा रहे राजनीतिक उपायों के साथ संघ सामाजिक उपायों पर जोर दे। इसमें सबसे अहम भूमिका वनवासी परिषद की हो सकती है। इसमें जन-जागरण और आदिवासी समुदाय को अपनी मान्यताओं के बारे में बताना शामिल है। ताकि उन्हें विश्वास हो कि वे जो हैं वही असल में हिंदू धर्म है। इसके अलावा धर्मांतरण में लगी एजेंसियों की आर्थिक कमर कैसे तोड़ी जाए यह भी बात की गई। सरकारों को योजनाएं इन तबकों तक पहुंचें। सभी धर्मांतरण के कारणों पर समग्रता से काम करने पर बात हुई।

शब्दावलियां व परिभाषाएं

भारतीयता जब हम कहें तो इसमें सबका भाव आना चाहिए। हिंदुत्व हम कहें तो इसमें भी सबका भाव आना चाहिए। दूसरे मतावलंबियों में विश्वास का जागरण हो। इसके लिए राष्ट्रीय मुस्लिम मंच जैसी इकाइयों का काम ज्यादा खास हो सकता है। हिंदुत्व, संस्कृति, अखंड भारत, विश्वगुरु आदि शब्दों का मखौल उड़ाने वालों को मौका नहीं मिलना चाहिए। हम इन्हें सही ढंग से परिभाषित करें और उतने ही सही ढंग से लोगों तक पहुंचाएं भी।

नव तकनीकी

नए दौर की तकनीकी हमारे हर कार्य में रिफ्लैक्ट होनी चाहिए। हम पुरातनवादी न कहलाएं। हम अत्याधुनिक किंतु जड़ों से जुड़े लोग बनें। इंटरनेट ने विचार प्रसार आसान बना दिया है। ऐसे में हमारे लोग इसमें सक्रिय रहें। इसमें भारतीयता से भरा कंटेंट परोसा जाए।

सामाजिक अनुसंधान इकाइयां

ऐसी सामाजिक अनुसंधान की इकाइयों को चिन्हित करना चाहिए जो सकारात्मक कार्य में लगी हैं। वे ग्रामीण आजीविका में भूमिका निभा सकती हैं। वे इंडीजीनस हों। इनका मकसद न्यूनत लाभांश और अधिकतम जनकल्याण हो, उन्हें साथ लेना चाहिए। इससे मजबूत आर्थिक ढांचा तैयार होगा। रोजगार संकट नहीं होगा।

भारतीयता को इंड्यूस करना है

आने वाले 10 वर्षों में भारतीयता को इंड्यूस करना होगा। जो बच्चे अभी 10 वर्ष के हैं। वे 20 वर्ष के होंगे। मतदान का अधिकार भी मिल चुकेगा। आजीविका निर्माण की ओर भी बढ़ चुके होंगे। इन्हें लक्ष्य करके ऐसे भारतीय मॉडल समाज में देने चाहिए जो आत्मसम्मान, गौरव, शौर्य और बुद्धिमता के मामले में दुनियाभर में कंपीटीटिव हों।

जातिय संघर्ष

हिंदू समाज जातियों विभक्त है। इसमें संघर्ष जैसे हालात न बनें। साथ ही जातियों की अच्छी परंपराएं भी जारी रह सकें। हमें ऐसे प्रयास करने होंगे। इसके लिए एक ही रास्ता है, हिंदुत्व।

मत निर्माण

लोकमत भारतीयता से सराबोर हो। हमारे प्रयास ऐसे हों कि भारत में रहने वाले सभी भारतीयों को हमारे इतिहास, परंपरा, संस्कृति, सभ्यता पर गौरव हो। यह तब होगा जब हम सब मिलकर सतत और जीवंत रूप से प्रामाणिकता के साथ लोगों तक पहुंचेंगे।

बाल, किशोर, नौजवान फोकस

बालकों और किशोरों, नौजवानों के साथ अपना संवाद बढ़ाना चाहिए। माता-पिता के साथ इन्हें भी जोड़ें। भारतीय संस्कृति और इसकी विशालता के बारे में औपचारिक विद्यालयों के अलावा अपनी ओर से शाखाओं, गोष्ठियों आदि का संचाल करें।

प्रतीक, महापुरुष, गौरव गाथाएं, स्थानीय महापुरुषों को उभारना

इस बीच संघ ने भारतीय प्रतीकों को हर स्तर पर भारतीय प्रतीक बनाने की बात पर जोर दिया। गुलामी और लूट के प्रतीक हटाने के लिए जनमानस तैयार करें। भारतीय महापुरुषों पर अच्छे लेखकों से कंटेंट बनवाएं। गौरव गाथाएं तैयार करवाएं। स्थानीय महापुरुषों को उभारें। उनके नाम की जयंती, पुण्यतिथि पर काम आयोजन करें। उनकी जीवनियां स्थानीय स्तर पर लोककवियों से लिखवाएं।

जनसंख्या नियंत्रण

संघ यह मानता ही है कि इसके लिए जरूरी दिशानिर्देश तो होने ही चाहिए, लेकिन यह विषय जन-जागरण का ज्यादा है। हमारे पास प्रकृति के दिए संसाधन सीमित हैं। ऐसे में आवश्यक है कि सह-अस्तित्व के भाव के साथ रहने वाले भारतीय ही जनसंख्या विस्फोट को रोक सकते हैं। यह प्रकृति सिर्फ हमारी नहीं हर जीवधारी की है। इसलिए जनसंख्या नियंत्रण का रास्ता जन-जागरण से होकर गुजरना चाहिए। यह सिर्फ भारत का नहीं दुनिया का विषय है।

Barun Sakhajee

Barun Sakhajee, Asso. Executive Editor