मेहनत के दम पर हासिल किया मुकाम रमा दांगी राजगढ़
मेहनत के दम पर हासिल किया मुकाम रमा दांगी राजगढ़
जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफर पर चल पड़ती है तो लाख मुसीबतों के बाद भी सफलता कदम चूमने को बेकरार हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ रमा दांगी के साथ जिसके लिए एक समय पढ़ाई रोकने की नौबत आ गई थी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
राजगढ़ जिले की ग्राम खजुरिया में रहने वाली रमा दांगी ने मध्यप्रदेश बोर्ड की प्राविण्य सूची में 7वां स्थान पाया है। बारहवीं कक्षा में ब्यावरा के खुजरिया गांव की रमा दांगी ने कला संकाय में 500 में से 466 अंक लेकर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है। रमा और उसकी पढ़ाई के बीच कई अड़चने आई लेकिन जहां चाह है, वहां राह है। रमा के पिता प्रेमनारायण खेती किसानी करते हैं। लेकिन उन्होंने रमा की पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहने दी। नर्सरी से लेकर 10वीं तक रमा की पढ़ाई निजी स्कूल में कराई और इसके बाद आर्थिक परेशानियों के चलते रमा की पढ़ाई रोकने की नौबत आ गई। तब रमा का पढ़ाई से वास्ता टूटना लगभग तय हो गया था कि रमा ने अपने पिताजी की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए शासकीय विद्यालय में दाखिला लेने का निर्णय लिया और गांव के ही हायर सेकेंडरी विद्यालय में एडमिशन लेकर जी जान से मेहनत की और जिले में टॉप कर प्रदेश की प्राविण्य सूची में सातवां स्थान पा कर यह साबित कर दिया कि मुश्किलें चाहे कितनी बड़ी हो लेकिन अगर कुछ करने की चाह आपके अंदर है तो आपको लक्ष्य प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता। ग्रामीण इलाके से होने के कारण कई बार रमा को सामाजिक तानों का भी सामना करना पड़ा कि लड़की है ज्यादा पढ़-लिख कर आखिर क्या करेगी। लेकिन इन सभी विपरित परिस्थितियों से लड़ते हुए रमा ने अपना हौसला बनाए रखा और अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब रमा पीएससी की तैयारी कर प्रशासकीय सेवाओं में जाना चाहती है ताकि पढ़ाई के लिए जो कुछ परेशानियां उसने उठाई है, उन तमाम परेशानियों को समाज से हटा सके। रमा ने बताया कि उसके पिताजी की आर्थिक स्थिति अभी भी इतनी मजबूत नहीं है कि वह इसी वर्ष पीएससी की कोचिंग व तैयारियां किसी महानगर में जाकर कर सके। इसके चलते रमा ने पीएससी की तैयारी को अगले 2 वर्षों के लक्ष्य में शामिल किया है। लेकिन जब उसे IBC24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप की जानकारी मिली तो इसे रमा ने अपने पीएससी के लक्ष्य को पाने में एक नया रास्ता बताया है।

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