Vishnu Ka Sushasan: राजिम कुंभ (कल्प) में दिखी परंपरा, पर्यटन और प्रगति की त्रिवेणी, साय सरकार ने मेले को दी नई भव्यता, स्थानीय लोगों को मिला रोजगार

Vishnu Ka Sushasan: Organizing the Rajim Kumbh (Kalpa)

Vishnu Ka Sushasan: राजिम कुंभ (कल्प) में दिखी परंपरा, पर्यटन और प्रगति की त्रिवेणी, साय सरकार ने मेले को दी नई भव्यता, स्थानीय लोगों को मिला रोजगार
Modified Date: February 25, 2026 / 11:58 pm IST
Published Date: February 25, 2026 11:58 pm IST

रायपुरः Vishnu Ka Sushasan: छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने जहां एक ओर बुनियादी ढांचे, राजस्व और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक परंपराओं और आस्था से जुड़े आयोजनों को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया। अपने कार्यकाल के दो वर्षों में साय सरकार का दृष्टिकोण केवल सड़क, बिजली, पानी और निवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता को भी विकास का आधार माना गया। सरकार का मानना है कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं मापा जाता, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान और सामाजिक समरसता भी उसकी महत्वपूर्ण कसौटी है। गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में परंपरागत मेलों, उत्सवों और धार्मिक आयोजनों को समर्थन देकर सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने की कोशिश की गई है। साय सरकार ने छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाने वाले राजिम के मेले को कल्प कुंभ का दर्जा देकर उसकी वास्तविक गरिमा को फिर से लौटाई है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहे राजिम कुंभ को लंबे समय से प्रदेश के ‘आस्था महापर्व’ के रूप में देखा जाता रहा है। त्रिवेणी संगम पर आयोजित यह आयोजन केवल स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि संत-समागम, आध्यात्मिक प्रवचन और लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी प्रमुख मंच रहा है, लेकिन पिछली सरकार के कार्यकाल में इस आयोजन की पारंपरिक भव्यता और गरिमा में कमी आई। कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों की वजह से संत-समाज की सहभागिता, व्यवस्थाओं की व्यापकता और प्रचार-प्रसार के स्तर को लेकर भी सवाल उठे। कई लोगों का मानना था कि जिस स्तर की राष्ट्रीय पहचान राजिम कुंभ को पहले प्राप्त थी, वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ गई थी, लेकिन प्रदेश में साय सरकार के आने के बाद इसमें काम शुरू हुआ और एक बार फिर कुंभ के तर्ज पर मेले का आयोजन कर राजिम को वैश्विक पटल पर स्थापित किया।

आयोजन की व्यवस्थाएं हुई सुदृढ़

सरकार ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, सुरक्षा और आवास सुविधाओं में सुधार पर जोर दिया। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई, बल्कि स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला। राजिम कुंभ (कल्प) इस बार केवल धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और स्थानीय रोजगार सृजन का भी बड़ा मंच बना। आयोजन स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई। पात्र हितग्राहियों को मौके पर पंजीयन, मार्गदर्शन और आवेदन संबंधी सहायता भी प्रदान की गई। सरकारी प्रतिनिधियों ने कृषि, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाई। इससे दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आए लोगों को सीधे लाभ मिला।

स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर

राजिम कुंभ (कल्प) के आयोजन से स्थानीय स्तर पर व्यापक आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं। अस्थायी दुकानों और भोजनालयों के माध्यम से व्यापारियों को आय का अवसर मिला। स्व-सहायता समूहों (SHG) और महिला समूहों को अपने उत्पाद बेचने का मंच मिला। परिवहन, टेंट, लाइटिंग, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी संख्या में लोगों को अस्थायी रोजगार मिला। स्थानीय हस्तशिल्प और लोक कला से जुड़े कलाकारों को भी प्रस्तुति का अवसर मिला, जिससे सांस्कृतिक पहचान के साथ आय का स्रोत भी सशक्त हुआ। कुल मिलाकर राजिम कुंभ (कल्प) ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और आर्थिक गतिविधियों का भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं।


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।