Budget 2026: बजट में इन्वेस्टर्स के लिए झटका! म्यूचुअल फंड और डिविडेंड नियमों में हुए ये बड़े बदलाव, अब निवेशकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Budget 2026: अब तक निवेशकों को आयकर अधिनियम की धारा 93 के तहत सुविधा थी कि वे म्यूचुअल फंड यूनिट्स या डिविडेंड से मिली आय पर 20% तक के ब्याज खर्च को अपने टैक्स में से घटा सकते थे। इससे निवेशकों की टैक्स देनदारी कम होती थी।

Budget 2026: बजट में इन्वेस्टर्स के लिए झटका! म्यूचुअल फंड और डिविडेंड नियमों में हुए ये बड़े बदलाव, अब निवेशकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

(Budget 2026/ Image Credit: Pexels)

Modified Date: February 2, 2026 / 05:06 pm IST
Published Date: February 2, 2026 4:32 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बजट 2026 में बड़ा बदलाव: डिविडेंड और म्यूचुअल फंड लोन पर टैक्स छूट खत्म।
  • पुरानी सुविधा: निवेशक 20% तक के ब्याज खर्च को टैक्स में घटा सकते थे।
  • लाभार्थी: लोन लेकर लॉन्ग-टर्म निवेश करने वाले निवेशक।

नई दिल्ली: Union Budget 2026 केंद्रीय बजट 2026 में निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो लोन लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। अब तक निवेशकों को राहत मिलती थी क्योंकि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए लोन के ब्याज का कुछ हिस्सा टैक्स से घटा सकते थे। लेकिन बजट 2026 के प्रस्ताव के बाद यह सुविधा खत्म होने जा रही है। यानी अब डिविडेंड कमाने के लिए लिया गया लोन टैक्स बचाने में मदद नहीं करेगा।

क्या थी पुरानी सुविधा (What was the Old Facility)

अभी तक आयकर अधिनियम की धारा 93 के तहत निवेशकों को यह छूट मिलती थी कि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से हुई आय का अधिकतम 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च टैक्स से घटा सकते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक को 1 लाख रुपये का डिविडेंड मिला और उसने 25 हजार रुपये ब्याज चुकाया, तो वह 20 हजार रुपये तक की कटौती ले सकता था। यह नियम खास तौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद था जो लोन लेकर लॉन्ग टर्म इनकम बनाने की रणनीति अपनाते थे।

बजट 2026 का प्रस्ताव (Budget 2026 Proposal)

बजट दस्तावेजों के अनुसार, अब डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आय पर किसी भी तरह का ब्याज खर्च टैक्स में घटाया नहीं जा सकेगा। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि चाहे लोन सीधे निवेश के लिए लिया गया हो, उस पर दिया गया ब्याज अब टैक्स छूट के दायरे में नहीं आएगा। यह नियम सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगा, चाहे वे व्यक्तिगत निवेशक हो या कोई अन्य श्रेणी का हो।

निवेशकों पर प्रभाव (Impact on Investors)

इस बदलाव का मतलब है कि कर्ज लेकर निवेश करने की टैक्स एफिशिएंसी कम हो जाएगी। निवेशक जो डिविडेंड इनकम को ध्यान में रखकर लोन लेते थे, उन्हें अब अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हाई-लेवरेज निवेश पर ब्रेक लगेगा और निवेशक ज्यादा सतर्क होकर फैसले लेंगे। आने वाले समय में डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई करने वालों के लिए टैक्स प्लानिंग पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।