आकांक्षी जिलों की तर्ज पर कृषि क्षेत्र में तेज विकास के लिए 100 जिलों की हो पहचान: प्रधानमंत्री मोदी
आकांक्षी जिलों की तर्ज पर कृषि क्षेत्र में तेज विकास के लिए 100 जिलों की हो पहचान: प्रधानमंत्री मोदी
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तरह 100 जिलों की पहचान करने को कहा।
मोदी ने नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह भी कहा कि सभी राज्यों के विकसित हुए बिना देश ‘विकसित भारत’ नहीं बन सकता। साथ ही, उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए कारोबार सुगमता और शिकायतों के तेजी से निपटान की जरूरत बतायी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में सभी राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में हिस्सा लिया। यह पहली बार है जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शाषी परिषद की बैठक में भाग लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वैश्विक अनिश्चितता और अस्थिरता के बीच जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की वृद्धि गाथा दुनिया को प्रेरित कर रही है।’’
उन्होंने जिला स्तर पर, खासकर ‘आकांक्षी जिले के पैमानों के जरिये प्रगति का मूल्यांकन करने की जरूरत बतायी।’
आकांक्षी जिला कार्यक्रम केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसे 2018 में शुरू किया गया था। नीति आयोग के नेतृत्व में, इसका उद्देश्य 28 राज्यों के 112 सबसे पिछड़े जिलों को तेजी से रूपांतरित करना है, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके और देश के सबसे वंचित समुदायों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा सके
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया, ‘‘इसी तरह, सकारात्मक नतीजे लाने के लिए कृषि के क्षेत्र में भी 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए।’’ उन्होंने राज्यों से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया ताकि आकांक्षी दृष्टिकोण के जरिये उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सके।’’
सहकारी संघवाद के महत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।’’
बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जनसांख्यिकीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘देश के युवा ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। क्योंकि लगभग 70 करोड़ भारतीयों की उम्र 25 साल से कम है।’’
उन्होंने इसे ‘जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए, राज्यों से शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण जैसे प्रयासों के जरिये इसे ‘विकास के लाभांश’ में बदलने पर ध्यान देने का आग्रह किया, ताकि युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने कई देशों के साथ भारत के हाल के व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों से युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए मौके बनाने और संबंधित लोगों को इन समझौतों से मिलने वाले लाभ का सही इस्तेमाल करने के लिए तैयार करने को कहा।
उन्होंने राज्यों से भागीदार देशों से निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का भी आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर जोर देते हुए राज्यों से ‘लखपति दीदी’ की संख्या तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ करने की दिशा में काम करने और ‘नारी शक्ति’ के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की बात भी कही।
उन्होंने राज्यों से ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके इर्द-गिर्द निर्यात-उन्मुख रणनीतियां विकसित करने का आग्रह किया।
उन्होंने अल-नीनो का उल्लेख करते हुए राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों को प्रोत्साहित करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा खरीफ सत्र में किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ खेती में बढ़ते भरोसे को दिखाती है।
प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए एक निगरानी रूपरेखा और 100-दिन तथा पांच-साल का लक्ष्य तय करने की जरूरत बतायी।
निवेश आकर्षित करने के लिए अच्छे राजकाज, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार सुगमता और डेटा सेंटर तथा कृत्रिम मेधा जैसे उभरते क्षेत्रों में मौकों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए कौशल से लोगों को लैस करने के लिए और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।
भाषा रमण अजय
अजय

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