फॉक्सकॉन, डिक्सन समेत 22 परियोजनाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण योजना के लिए मंजूरी

फॉक्सकॉन, डिक्सन समेत 22 परियोजनाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण योजना के लिए मंजूरी

फॉक्सकॉन, डिक्सन समेत 22 परियोजनाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण योजना के लिए मंजूरी
Modified Date: January 2, 2026 / 09:19 pm IST
Published Date: January 2, 2026 7:58 pm IST

नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 22 नए प्रस्तावों को शुक्रवार को मंजूरी दी। इनमें अनुमानित निवेश 41,863 करोड़ रुपये और अनुमानित उत्पादन 2,58,152 करोड़ रुपये है। स्वीकृत प्रस्तावों में डिक्सन, सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सकॉन (युझान टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के प्रस्ताव शामिल हैं। इन स्वीकृतियों से प्रत्यक्ष रोजगार के 33,791 अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

इससे पहले घोषित 12,704 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 24 आवेदनों की मंजूरी के क्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ईसीएमएस के तहत 22 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें अनुमानित निवेश 41,863 करोड़ रुपये और अनुमानित उत्पादन 2,58,152 करोड़ रुपये है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कंपनियों को स्वीकृति पत्र सौंपे।

मंत्रालय द्वारा अनुमोदनों के तीसरे चरण पर जारी एक ‘नोट’ के अनुसार, इस मंजूरी में 11 लक्षित खंड के उत्पादों का विनिर्माण शामिल है जिनका मोबाइल विनिर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक, स्वचालित और आईटी हार्डवेयर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है।

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स्वीकृत परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में फैली हुई हैं। ये देश भर में भौगोलिक रूप से संतुलित औद्योगिक वृद्धि और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के विस्तार पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाती हैं।

इन 11 उत्पादों में से, पांच उत्पाद पीसीबी, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर और लिथियम-आयन सेल जैसे मूल घटक हैं। तीन उत्पाद कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर जैसे उप-असेंबली से संबंधित हैं। अन्य तीन उत्पाद एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट जैसी आपूर्ति श्रृंखला की वस्तुएं हैं।

‘नोट’ में कहा गया कि इन स्वीकृतियों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करना, महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए आयात पर निर्भरता को कम करना और भारत में उच्च मूल्य वाली विनिर्माण क्षमताओं के विकास का समर्थन करना है। सूत्रों के अनुसार निवेश और रोजगार का बड़ा हिस्सा एप्पल के नए वेंडर्स से आएगा, जो अब उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो रहे हैं। इनमें से कुछ वेंडर्स एप्पल के अंतरराष्ट्रीय ठिकानों के लिए निर्यात भी करेंगे।

गौरतलब है कि एप्पल के साथ जुड़ने वाले पांच वेंडर में मदरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एटीएल बैटरी टेक्नोलॉजी इंडिया, फॉक्सकॉन (युजहान टेक इंडिया) और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शामिल हैं। वैष्णव ने बड़े सुधारों, सक्षम नीतियों तथा परियोजनाओं के कुशल और तेज क्रियान्वयन पर केंद्र सरकार के जोर के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ”परिणाम हर क्षेत्र में साफ दिखाई दे रहे हैं।”

ताजा चरण में सबसे अधिक निवेश ‘एनक्लोजर श्रेणी’ में होने की संभावना है, जहां तीन परियोजनाओं के जरिए 27,166 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। मोबाइल एनक्लोजर संरचनात्मक ढांचे होते हैं, जो आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की सुरक्षा करते हैं। इनका स्मार्टफोन तथा हाथ में लेकर इस्तेमाल करने वाले उपकरणों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

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