ट्रेड यूनियनों ने कहा, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ मजदूर हिस्सा लेंगे

ट्रेड यूनियनों ने कहा, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ मजदूर हिस्सा लेंगे

ट्रेड यूनियनों ने कहा, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ मजदूर हिस्सा लेंगे
Modified Date: February 9, 2026 / 07:36 pm IST
Published Date: February 9, 2026 7:36 pm IST

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच ने सोमवार को कहा कि 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान जारी है, और उम्मीद है कि देश भर से कम से कम 30 करोड़ मजदूर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।

यूनियनों के समूह ने केंद्र सरकार की ‘‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों’’ के खिलाफ अपना विरोध दिखाने के लिए नौ जनवरी, 2025 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव, अमरजीत कौर ने पत्रकारों को बताया कि इस बार ‘‘12 फरवरी (बृहस्पतिवार) को बुलाई गई हड़ताल में, 30 करोड़ से कम मज़दूर हिस्सा नहीं लेंगे। पिछली बार हुए विरोध-प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ मज़दूरों ने हिस्सा लिया था।’’

उन्होंने बताया कि हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में दिखेगा, जो पिछले साल के लगभग 550 जिलों से ज़्यादा है।

कौर ने यह भी कहा कि ट्रेड यूनियनों के भागीदारी के दावे जिला और ब्लॉक स्तर पर की गई मजबूत तैयारियों पर आधारित हैं, और किसान, साथ ही दूसरे फेडरेशन भी उनके साथ हैं।

बीजेपी शासित राज्यों में प्रस्तावित हड़ताल के असर के बारे में उन्होंने कहा कि ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे और दूसरे राज्यों में भी आंदोलन का बहुत ज़्यादा असर होगा।

संयुक्त फोरम के एक बयान के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी और ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन और लामबंदी में शामिल होने के लिए पूरा समर्थन दिया है।

इसी तरह, कृषि मज़दूर यूनियनों का संयुक्त मोर्चा भी इस अभियान का हिस्सा है, जो हड़ताल में शामिल हो रहा है, जिसमें ‘मनरेगा’ को बहाल करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

लगभग सभी राज्यों में, सभी क्षेत्रों – सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों में, ग्रामीण और शहरी भारत में मज़दूरों, किसानों और आम जनता के बीच बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं।

कई जगहों पर छात्र और युवा समूह ऐसे अभियानों में शामिल हुए हैं। आम नागरिक हड़ताल की मांगों के लिए अपना समर्थन दे रहे हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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