देश के 40 प्रतिशत ‘गिग’ कर्मी 15,000 रुपये प्रति माह से कम कमाते हैं: आर्थिक समीक्षा
देश के 40 प्रतिशत ‘गिग’ कर्मी 15,000 रुपये प्रति माह से कम कमाते हैं: आर्थिक समीक्षा
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि भारत में करीब 40 प्रतिशत अस्थायी (गिग) कर्मचारी प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाते हैं। समीक्षा में इसमें महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप का आह्वान किया गया है। आमतौर पर ई-कॉमर्स मंचों के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को गिग कर्मी कहा जाता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों में आर्थिक समीक्षा पेश की।
समीक्षा में उचित मजदूरी सुनिश्चित करने और नियमित एवं अस्थायी (गिग) रोजगार के बीच लागत असमानता को कम करने के लिए प्रतीक्षा समय (वेटिंग टाइम) के मुआवजे सहित ‘‘न्यूनतम प्रति घंटा या प्रति कार्य आय’’ निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ऑनलाइन मंच के हाल में हुए विकास और नीतिगत सुधारों से कार्य अवसंरचना को नया रूप मिल रहा है, जिससे नियमितीकरण एवं लचीलेपन को प्रोत्साहन मिल रहा है। श्रम संहिताओं ने ‘गिग’ और ‘ऑनलाइन’ श्रमिकों को औपचारिक रूप से मान्यता दी है। इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार हुआ है तथा कल्याण कोष और लाभ को बढ़ावा मिला है।
भारत में ‘गिग’ कर्मी (जिनमें क्विक कॉमर्स और खाद्य आपूर्ति के ‘राइडर्स’ शामिल हैं) ने हाल ही में बेहतर भुगतान, बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, देश के श्रम कानूनों के तहत औपचारिक मान्यता और 10 मिनट की ‘डिलिवरी’ समयसीमा को हटाने की मांग को लेकर अपने श्रम संघों के माध्यम से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किए। उनके संगठनों ने इस मुद्दे को केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के समक्ष उठाया।
इस आंदोलन के परिणामस्वरूप, सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने मंच से 10 मिनट में आपूर्ति के दावे को हटाने का कहा।
समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में 77 लाख कर्मियों की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इनकी संख्या एक करोड़ 20 लाख हो गई है। इसके अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक लोग ‘स्मार्ट फोन’ का उपयोग कर रहे हैं और प्रति माह 15 अरब यूपीआई लेनदेन किए जा रहे है।
इसमें कहा गया कि भारत में ‘गिग’ कर्मियों की संख्या कुल कार्यबल का दो प्रतिशत से अधिक है। इसके वर्ष 2029-30 तक 6.7 प्रतिशत होने का अनुमान है जिससे सकल घरेलू उत्पाद में 2.35 लाख करोड़ रुपये के योगदान होने की संभावना है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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