जीईएम के जरिये 2025-26 में हुए 5.03 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन

जीईएम के जरिये 2025-26 में हुए 5.03 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन

जीईएम के जरिये 2025-26 में हुए 5.03 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन
Modified Date: April 6, 2026 / 06:29 pm IST
Published Date: April 6, 2026 6:29 pm IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) सार्वजनिक खरीद मंच ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (जीईएम) के माध्यम से वित्त वर्ष 2025-26 में 5.03 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए जो 2024-25 की तुलना में 7.4 प्रतिशत कम हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

वित्त वर्ष 2024-25 में जीईएम के जरिये 5.43 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे।

जीईएम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने कहा कि वृद्धि में गिरावट का कारण कोयला मंत्रालय के योगदान में कमी है जिसकी कुल बिक्री में हिस्सेदारी 34 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 20 प्रतिशत (1,02,219 करोड़ रुपये) रह गई।

कोल इंडिया लिमिटेड ने 2025-26 में इस मंच के माध्यम से 82,285 करोड़ रुपये के सामान एवं सेवाओं की खरीद की।

कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ जीईएम ने कुल मिलाकर 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है जिसमें 2025-26 में पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का जीएमवी पार करना भी शामिल है।’’

उन्होंने बताया कि मंच की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसमें ‘रेट कॉन्ट्रैक्ट’ (अनुबंध दर) और वैश्विक निविदा पूछताछ (जीटीई) जैसी कई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

कुमार ने कहा, ‘‘ मंच को अब इस तरह उन्नत किया गया है कि यह बहु-मुद्रा में बोली लगाने और अंतरराष्ट्रीय विक्रेताओं की भागीदारी का समर्थन करता है।’’

जीटीई सुविधा से भारत के मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) साझेदार देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन की कंपनियों को लाभ मिलेगा। इन समझौतों के तहत भारत ने शर्तों के साथ सरकारी खरीद के क्षेत्र को खोला है।

इन देशों की कंपनियां भारत सरकार के विभागों और संस्थाओं की वैश्विक निविदाओं में भाग ले सकती हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में जीईएम से खरीद करने वाले प्रमुख मंत्रालयों में कोयला, रक्षा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, बिजली, वित्त और इस्पात शामिल रहे। प्रमुख केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसई) खरीदारों में कोल इंडिया, एनटीपीसी, एनएलसी इंडिया, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) और ओएनजीसी शामिल हैं।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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