अदाणी पर संकट के बाद छंटे, विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद बढ़ी : रिपोर्ट

अदाणी पर संकट के बाद छंटे, विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद बढ़ी : रिपोर्ट

अदाणी पर संकट के बाद छंटे, विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद बढ़ी : रिपोर्ट
Modified Date: May 24, 2026 / 10:52 am IST
Published Date: May 24, 2026 10:52 am IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने कहा है कि अदाणी समूह से जुड़े बड़े विवाद और अमेरिकी नियामकीय जांच का जोखिम अब काफी हद तक पीछे छूट चुका हैं। इससे समूह में विदेशी निवेश और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।

ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में समूह की चार प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों — अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशन इकॉनमिक जोन, अदाणी ग्रीन एनर्जी, अदाणी पावर और अंबुजा सीमेंट का विश्लेषण किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में सामने आए शॉर्ट-सेलर विवाद और बाद में अमेरिका में शुरू हुई जांच के कारण कई विदेशी निवेशकों और वैश्विक कोषों ने अदाणी समूह से दूरी बना ली थी। हालांकि, अब अमेरिकी मामलों में राहत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है।

बर्नस्टीन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) से जुड़े मामले के समाधान और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा समूह के खिलाफ आरोप हटाने की प्रक्रिया ने समूह के शेयरों पर बना बड़ा दबाव कम कर दिया है। इसके बावजूद कई शेयर अभी भी संकट से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले चार वर्षों में समूह ने दो बड़े झटके झेले। पहला जनवरी, 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और दूसरा नवंबर, 2024 से शुरू हुए अमेरिकी एसईसी तथा न्याय विभाग की जांच से जुड़ा घटनाक्रम।

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी समूह पर शेयरों में हेरफेर, कर पनाहगाह के दुरुपयोग और लेखांकन में अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और बाजार पूंजीकरण में अरबों डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, अदाणी समूह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण बताया था।

इसी बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि अधिकांश जांच पूरी हो चुकी है और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे व्यापक बाजार हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब हिंडनबर्ग रिसर्च ने अब अपना परिचालन बंद कर दिया है।

बर्नस्टीन के अनुसार, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की क्षमता अदाणी समूह की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, ताप विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समूह लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कंटेनर पोर्ट बाजार में अदाणी समूह की हिस्सेदारी अब लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि सितंबर, 2024 के बाद तेज पूंजीगत निवेश के कारण समूह का कुल शुद्ध कर्ज करीब एक लाख करोड़ रुपये बढ़ा है। इसके बावजूद आय में मजबूत वृद्धि जारी है और वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच समूह की कर पूर्व आय (एबिटा) में सालाना 22 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अदाणी समूह के वित्तपोषण स्रोतों में भी विविधता आई है। घरेलू बैंकों पर निर्भरता घटाते हुए समूह ने बॉन्ड वित्त को बढ़ावा दिया है। हालिया अमेरिकी घटनाक्रम के बाद डॉलर कोष तक पहुंच और बेहतर हो सकती है।

रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि विवादों और जांचों के बावजूद अदाणी समूह की परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसकी मजबूत मौजूदगी उसे भारत की विकास कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए हुए है।

भाषा अजय अजय

अजय


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