कृषि क्षेत्र ने आगामी बजट में प्रौद्योगिकी,जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा देने की वकालत की

कृषि क्षेत्र ने आगामी बजट में प्रौद्योगिकी,जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा देने की वकालत की

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 01:06 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 01:06 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) कृषि उद्योग से जुड़े लोग और विशेषज्ञ आगामी बजट से पहले डिजिटल अवसंरचना, जलवायु-अनुकूल खेती पद्धतियों और प्रौद्योगिकी को अपनाने में अधिक निवेश की जोरदार वकालत कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उस कृषि क्षेत्र में बदलाव लाया जा सकता है जो देश की लगभग आधी आबादी को रोजगार देता है लेकिन राष्ट्रीय उत्पादन में इसका योगदान पांचवें हिस्से से भी कम है।

भारत के करीब 45 प्रतिशत कार्यबल को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र सहारा प्रदान करते हैं, जबकि सकल मूल्यवर्धन में इनका योगदान केवल 18 प्रतिशत के आसपास है।

उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि 2026-27 का बजट इस क्षेत्र को केवल एक कल्याणकारी चिंता के बजाय आर्थिक वृद्धि के इंजन के रूप में पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।

ईवाई इंडिया में जीपीएस-कृषि, आजीविका, सामाजिक एवं कौशल के प्रमुख अमित वत्स्यायन ने कहा, ‘‘ कृषि को न केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के रूप में बल्कि आर्थिक वृद्धि के एक विश्वसनीय इंजन के रूप में तेजी से मान्यता मिल रही है। एक ऐसा इंजन जो उत्पादकता, रोजगार, ग्रामीण मांग और जुझारूपन को बढ़ावा दे सकता है। ’’

दुग्ध क्षेत्र को समर्थन की आवश्यकता-

हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्राह्मणी नारा ने सितंबर 2025 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के युक्तिकरण से उत्पन्न अनुकूल परिस्थितियों की ओर इशारा किया, जिसने संगठित दुग्ध क्षेत्र में पनीर, ‘चीज’, घी और मक्खन जैसे उच्च प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को गति दी है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन और राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से 3,00,000 से अधिक किसानों को संगठित परिवेश में एकीकृत किया गया है।

नारा ने बजट में पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे और गुणसूत्र-आधारित वीर्य तक रियायती पहुंच; भारत के 68,000 पंजीकृत पशु चिकित्सकों तथा 110,000-120,000 की आवश्यकता के बीच के अंतर को पाटने के लिए पशु चिकित्सा महाविद्यालयों की क्षमता का विस्तार और लघु दुग्ध इकाइयों खासकर महिला उद्यमियों के लिए पूंजीगत सब्सिडी में वृद्धि की मांग रखी है।

हरित अवसंरचना और प्रौद्योगिकी को अपनाना महत्वपूर्ण-

वत्स्यायन ने सूक्ष्म सिंचाई, जल प्रबंधन, जलभंडार पुनर्भरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाली कृषि संपत्तियों में निवेश के जरिये हरित अवसंरचना और जलवायु-अनुकूल सिंचाई को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने बयान में कहा, ‘‘ वृद्धि के दृष्टिकोण से, ये उपाय मजबूत गुणक के रूप में भी कार्य करते हैं, ग्रामीण मांग को प्रोत्साहित करते हैं, किसानों की आय को स्थिर करते हैं और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करते हैं।’’

डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा-

मैपमाईक्रॉप के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) स्वप्निल जाधव ने सरकार से डिजिटल बुनियादी ढांचे और सुगम ऋण संपर्क को बढ़ावा देने का आग्रह किया ताकि सटीक (सही समय पर, सही जगह पर, सही मात्रा में खेती) कृषि को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘ कृषि ड्रोन, आईओटी सेंसर और एआई-संचालित विश्लेषण में 14 करोड़ किसानों के लिए पैदावार बढ़ाने, पानी एवं उर्वरक के उपयोग को अनुकूलित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रति मजबूत करने की अपार क्षमता है।’’

संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता-

बीडीओ इंडिया के कृषि साझेदार सौम्य बिस्वास ने लगातार बनी हुई संरचनात्मक चुनौतियों पर प्रकाश डाला जिनमें छोटे एवं खंडित कृषि भूमि, संबद्ध क्षेत्रों में अपर्याप्त निवेश, फसल कटाई के बाद होने वाले भारी नुकसान और अनुसंधान के लिए अपर्याप्त वित्त पोषण शामिल हैं।

उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के वास्ते डीएआरई के लिए धन बढ़ाने, पशुधन एवं मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने, बाजार-आधारित रणनीतियों तथा ऋण गारंटी के माध्यम से परिवार कल्याण संगठनों को सशक्त बनाने और पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए बागवानी, दालों व तिलहन में विविधीकरण को प्रोत्साहित करने सहित प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वत्स्यायन ने कहा कि ‘एग्रीस्टैक’ को एक डिजिटल सार्वजनिक संसाधन के रूप में प्रभावी ढंग से लागू करना इस परिवर्तन की नींव बन सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ किसानों के डेटा, भूमि अभिलेखों, ऋण, बीमा, विस्तार व बाजार मंचों को एकीकृत करके ‘एग्रीस्टैक’ सटीक लक्ष्यीकरण को सक्षम बना सकता है। साथ ही यह लेनदेन लागत को कम कर सकता है और निजी निवेश को आकर्षित कर सकता है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा