नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने कहा है कि शहरी स्थानीय निकायों के परिसंपत्ति प्रबंधन और परिचालन दक्षता का आकलन काफी हद तक उनके खातों को आधुनिक रूप देने, सटीक और पारदर्शी बनने पर निर्भर करता है।
कैग ने इन खातों की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं और भविष्य में बेहतर गुणवत्ता वाले खाते तैयार करने में राज्य सरकारों के साथ सहयोग का आश्वासन दिया है।
उन्होंने सोमवार को यहां स्थानीय निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए राज्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहर वित्त पोर्टल के माध्यम से खातों की तैयारी में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। पोर्टल पर सभी स्थानीय निकायों के खाते अपलोड किए जा रहे हैं।’’
मूर्ति ने कहा कि इसी आधार पर कैग की प्राथमिकता इन खातों की परिपक्वता का आकलन करना होगा और एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में, विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 700 खातों का विश्लेषण किया गया है।
उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग के अनुदानों में दोगुना से अधिक की वृद्धि हुई है, और शहरी चुनौती कोष नामक एक विशेष योजना में ही चार लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की क्षमता है जिसका लाभ उठाया जा सकता है।
कैग ने कहा कि प्रत्येक राज्य स्थानीय निकायों को अनुदान देने के लिए अपनी-अपनी प्रक्रिया का पालन करता है और इसीलिए, इन अंतरण की रिपोर्टिंग में अपेक्षित एकरूपता नहीं होती है।
मूर्ति ने वित्त आयोग के इस विचार से भी सहमति व्यक्त की कि कैग राज्यों द्वारा अपने स्थानीय निकायों को दिए गए अनुदानों की एकसमान और पारदर्शी रिपोर्टिंग कर सकता है और इससे बहुमूल्य जानकारी प्राप्त होगी और इस शर्त का उचित कार्यान्वयन भी सुनिश्चित होगा।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग ने पिछले कुछ महीनों में कई बातचीत की हैं और पंचायती राज संस्थाओं को आदर्श ग्राम पंचायत के उदाहरण के रूप में स्थापित करने में कैग के सहयोग के लिए अत्यंत आभारी है।
उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब पंचायती राज संस्थाएं अपने लोगों के प्रति जवाबदेह हों, उनकी समस्याओं का समाधान करें और इस तरह के लेखा-जोखा रखें जिससे बैंक से वित्तपोषण हो सके।
भाषा रमण अजय
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