नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) बॉश ग्लोबल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) दत्तात्री सालगामे ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) इंजीनियरिंग कार्य के दायरे को बढ़ा रहा है और यह केवल लागत घटाने का नहीं बल्कि मूल्य सृजन का एक माध्यम बनता जा रहा है।
सालागामे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि एआई भारत को ‘वॉल्यूम इंजीनियरिंग’ (संख्या आधारित) से ‘वैल्यू इंजीनियरिंग’ (गुणवत्ता आधारित) की ओर बढ़ने का एक बड़ा अवसर प्रदान कर रहा है, जिससे प्रौद्योगिकी कंपनियां वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावशाली परिणाम दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि एआई को अक्सर केवल एक प्रौद्योगिकी नजरिए से देखा जाता है, जबकि इसका प्रभाव प्रौद्योगिकी से कहीं आगे है। यह कॉरपोरेट परिदृश्य के सामाजिक पुनर्गठन से लेकर संगठनों के काम करने, टीमों के गठन और नेतृत्व करने के तरीकों को बुनियादी तौर पर बदल रहा है।
सालगामे ने कहा कि जहां स्वचालन पारंपरिक ‘वॉल्यूम इंजीनियरिंग’ को प्रभावित कर सकता है, वहीं यह कंपनियों के लिए ‘वैल्यू इंजीनियरिंग’ की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक प्रभावशाली परिणाम दिए जा सकें।
उन्होंने कहा, “यदि हम केवल कार्यबल के युक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तो हम एक बड़े अवसर से चूक जाएंगे। हमारा ध्यान इस बात पर है कि हम लागत घटाने के बजाय वैश्विक स्तर पर उच्च प्रभाव वाले परिणाम कैसे दें।”
उन्होंने कहा कि जो कंपनियां एआई को केवल दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के साधन के रूप में देखती हैं, वे इसके व्यापक संभावनाओं से चूक सकती हैं, जिनमें नए उत्पादों, सेवाओं और उपभोक्ता अनुभवों का निर्माण शामिल है।
सालगामे ने कहा, “एआई को मूल्य सृजन के उपकरण के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे नई संभावनाएं खुलें।”
उन्होंने बताया कि बॉश ग्लोबल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज (बीजीएसडब्ल्यू) जर्मनी के बाहर बॉश का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी केंद्र है, जो परिवहन समाधान, औद्योगिक उपकरणों और घरेलू उपकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सॉफ्टवेयर विकास और इंजीनियरिंग में योगदान देता है।
उन्होंने कहा कि भारत में बॉश की मौजूदगी 1990 के दशक की शुरुआत से है और यह कंपनी का सबसे पुराना तथा सबसे बड़ा वैश्विक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग केंद्र है।
सालगामे के अनुसार, भारत में कंपनी के करीब 24,151 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह संख्या 28,907 है।
भारत में प्रमुख केंद्र बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और कोयंबटूर में स्थित हैं।
भाषा योगेश रमण
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