सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख

सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख

सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख
Modified Date: September 26, 2023 / 08:38 pm IST
Published Date: September 26, 2023 8:38 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच मंगलवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में सभी तेल तिलहनों की थोक कीमतों में नरमी रही। हालांकि खुदरा बाजार में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) काफी ऊंचा तय किये जाने के कारण उपभोक्ताओं को ये खाद्यतेल महंगा मिल रहा है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो और मलेशिया एक्सचेंज में फिलहाल गिरावट का रुख है।

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उन्होंने कहा कि जब तक बंदरगाहों पर आयातकों द्वारा अपनी लागत से कम दाम पर आयातित खाद्यतेल बिकना नहीं रुकेगा, स्थिति में कोई सुधार होना असंभव है। आयातक अपने नुकसान के बदले बैंकों में अपनी ऋण लेने की सीमा बढ़वाते रहते हैं और यह नुकसान उनकी जेब से नहीं हो रहा है।

सूत्रों ने कहा कि देश के खाद्यतेल संगठनों की घोर विफलता है कि वह लगभग 30 साल से देश के तेल तिलहन उद्योग की जरुरतों के बारे में सरकार को अवगत नहीं करा पाई। उनकी जिम्मेदारी बनती थी कि वे सरकार को बतायें कि कब कितने आयात की जरुरत है, तेल मिलों की आयातित तेलों के कारण पेराई नहीं होने जैसे परेशानी हो रही है।

इन सस्ते आयातित तेलों के कारण जिस तरह इस बार सरसों तिलहन नहीं खप पाया है, उससे यह आशंका पैदा हो रही है कि इस तरह की नीतियां जारी रहने पर कुछ साल में सरसों का भी हाल सूरजमुखी और मूंगफली जैसा नहीं हो जाये जिनका उत्पादन पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है।

सूत्रों ने कहा कि वर्ष 1993-94 में सूरजमुखी की खेती लगभग 28 लाख हेक्टेयर में की जाती थी जो मौजूदा वक्त में लगभग 1-1.5 लाख हेक्टेयर ही सिमट गया है। इसी प्रकार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मूंगफली का अच्छा खासा उत्पादन होता था जो अब लगभग नगण्य रह गया है।

जो हाल इस बार सरसों का हुआ है, वैसी ही नीति आगे जारी रहती है तो कुछेक साल में सरसों भी मूंगफली की तरह सूखे मेवे की श्रेणी में विराजमान हो सकता है। आज स्थिति देखें तो आयातित तेल लगभग 74-76 रुपये लीटर बैठता है जबकि मूंगफली तेल का दाम इसके मुकाबले लगभग दोगुना (लगभग 170-180 रुपये लीटर) है यानी गरीबों की पहुंच से यह तेल लगभग बाहर हो चला है।

सूत्रों ने कहा कि देश में अत्यधिक खाद्य तेल आयात के बीच बंदरगाहों पर आयातकों द्वारा लागत से कम दाम पर बिकवाली करने से सरसों, सोयाबीन, मूंगफली तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला जैसे सभी तेल के थोक कीमतों में गिरावट रही।

मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 5,425-5,475 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,465-7,515 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 18,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,635-2,920 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,680 -1,775 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,680 -1,790 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,775 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,580 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 7,950 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,945-5,040 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,695-4,810 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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