मांग बढ़ने, रुपये में गिरावट से बीते सप्ताह सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

मांग बढ़ने, रुपये में गिरावट से बीते सप्ताह सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

मांग बढ़ने, रुपये में गिरावट से बीते सप्ताह सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार
Modified Date: May 24, 2026 / 09:30 am IST
Published Date: May 24, 2026 9:30 am IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) रुपये के मूल्य में गिरावट रहने के बीच देश में मांग बढ़ने के कारण बीते सप्ताह सभी तेल-तिलहनों के दाम मजबूत रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम में सीमित घट-बढ़ के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये के निचले स्तर के करीब मंडराने से खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठ रहा है। इसके अलावा आयातक जो पहले लागत से काफी नीचे दाम पर अपना माल बेच रहे थे, वह घाटा पहले के मुकाबले अब कम हो गया है। इस वजह से बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन जैसे आयातित तेलों के दाम में मजबूती रही।

उन्होंने कहा कि शुक्रवार की रात सूरजमुखी तेल का दाम 20 डॉलर बढ़ा है जिसके बाद सस्ता होने की वजह से मूंगफली की मांग बढ़ी है। यह बीते सप्ताह, मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में सुधार आने का प्रमुख कारण है। सुधार के बावजूद मूंगफली का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम ही है।

सूत्रों ने कहा कि पंजाब, हरियाणा में बिनौला की 80-90 प्रतिशत पेराई मिलें बंद हो चली हैं और इसकी मांग होने से बीते सप्ताह बिनौला तेल में सुधार आया। इन उत्तर भारतीय राज्यों में इन दिनों बिनौला सीड की मांग को महाराष्ट्र से पूरा कर लिया जाता था, लेकिन इस बार महाराष्ट्र में ही बिनौला सीड के दाम ऊंचे हैं। यह बिनौला तेल में सुधार का प्रमुख कारण है।

उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह सरसों का भाव नीचे होने से इसकी खपत काफी बढ़ी है। सरसों की पेराई भी खूब हुई है। सरसों के रिफाइंड भी बने है। इसके कारण बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन में भी मजबूती रही।

सूत्रों ने कहा कि जिस प्रकार किसानों को कुछ तिलहन फसलों के अच्छे दाम मिले हैं, उसे देखते हुए आगे सरसों, सोयाबीन और कपास खेती का रकबा बढ़ने के आसार नजर आते हैं। यह दाम आगे भी बेहतर बने रहे तो तेल-तिलहन उत्पादन के मामले में देश आगे बढ़ पायेगा और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा के खर्च के बोझ में कमी आ सकती है।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 450 रुपये के सुधार के साथ 7,625-7,650 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 800 रुपये के सुधार के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 115-115 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,575-2,675 रुपये और 2,575-2,720 रुपये टिन (15 किलो) पर मजबूत बंद हुए।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 325-325 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 7,625-7,675 रुपये और 7,275-7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 75 रुपये सुधार के साथ 15,900 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 125 रुपये के सुधार के साथ 15,850 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 35 रुपये सुधार के साथ 12,310 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम भी 200 रुपये के सुधार के साथ 6,725-7,200 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 500 रुपये के सुधार के साथ 16,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 75 रुपये के सुधार के साथ 2,545-2,845 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 125 रुपये की मजबूती के साथ 13,975 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 225 रुपये की मजबूती के साथ 15,875 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 225 रुपये की बढ़त के साथ 14,725 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

सुधार के आम रुख और कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल का दाम भी 200 रुपये के सुधार के साथ 15,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा राजेश

अजय

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