त्योहारी मौसम से पहले अमेजन, फ्लिपकार्ट ने विक्रेताओं के शुल्क, जुर्माने में बदलाव किए

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त्योहारी मौसम से पहले अमेजन, फ्लिपकार्ट ने विक्रेताओं के शुल्क, जुर्माने में बदलाव किए

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 08:17 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 08:17 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट ने आगामी त्योहारी मौसम से पहले अपने मंचों पर विक्रेताओं के लिए शुल्क एवं जुर्माने की व्यवस्था में बदलाव किए हैं।

अमेजन इंडिया ने अपने विक्रेता मंच पर जारी सूचना में कहा है कि 17 अगस्त से उसकी ‘ईजी शिप’ और ‘सेल्फ शिप’ सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं के लिए ऑर्डर रद्द करने के शुल्क की गणना का तरीका बदल दिया गया है।

नई व्यवस्था में 10,000 रुपये से कम मूल्य वाले ऑर्डर पर मूल्य का 10 प्रतिशत, 10,001 से 50,000 रुपये के ऑर्डर पर आठ प्रतिशत, 50,001 से एक लाख रुपये तक के ऑर्डर पर पांच प्रतिशत और एक लाख रुपये से अधिक मूल्य के ऑर्डर पर दो प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा 18 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) भी लगेगा।

यह शुल्क तब लागू होगा जब विक्रेता खरीदार के अनुरोध के अलावा किसी अन्य कारण से ऑर्डर रद्द करता है। इसके अलावा, यदि विक्रेता ऑर्डर भेजने की अनुमानित तारीख के 24 घंटे के भीतर सामान भेजकर इसकी पुष्टि नहीं करता और ऑर्डर स्वत: रद्द हो जाता है, तब भी शुल्क लगेगा।

‘ईजी शिप’ सेवा में विक्रेता अपने पास सामान रखता और पैक करता है, जिसके बाद अमेजन का कर्मचारी उसे लेकर डिलिवरी करता है। वहीं, ‘सेल्फ शिप’ सेवा में विक्रेता खुद पैकिंग और डिलिवरी की व्यवस्था करता है।

अमेजन ने एक अन्य सूचना में कहा कि वह सात सितंबर से ‘फुलफिलमेंट सेंटर’, ‘ईजी शिप’ और ‘सेलर फ्लेक्स’ माध्यमों के लिए क्लोजिंग शुल्क भी बढ़ाएगा। 500 रुपये तक कीमत वाले उत्पादों पर यह शुल्क एक रुपये और 500 रुपये से अधिक कीमत वाले उत्पादों पर तीन रुपये बढ़ेगा। कंपनी ने ईंधन और लॉजिस्टिक लागत में वृद्धि को इसकी वजह बताया है।

अमेजन के मंच से जुड़े कुछ विक्रेताओं ने शुल्क ढांचे में इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कई बार ऑर्डर रद्द होने के कारण उनके नियंत्रण से बाहर होते हैं। उन्होंने डिलिवरी कर्मचारियों के तय समय पर सामान लेने के लिए नहीं पहुंचने जैसे मुद्दे भी उठाए।

इस बीच, फ्लिपकार्ट ने 23 अगस्त से ऑर्डर पूरा करने में चूक के लिए तीन-स्तरीय जुर्माना व्यवस्था लागू की है। इसके तहत ‘भेजने की निर्धारित तारीख’ (डीबीडी) तक सामान को पिकअप के लिए तैयार नहीं करने पर विक्रेता पर प्रति खेप 30 रुपये का जुर्माना लगेगा।

विक्रेता द्वारा ऑर्डर रद्द करने या लगातार तीन बार भेजने की समयसीमा चूकने के बाद ऑर्डर स्वत: रद्द होने पर 60 रुपये प्रति खेप का जुर्माना लगेगा। यदि ऑर्डर भेजने में देरी के बाद रद्द भी हो जाता है तो जुर्माना 90 रुपये प्रति खेप हो जाएगा।

पहले डीबीडी सीमा का उल्लंघन होने पर विक्रेता का खाता कुछ समय के लिए बंद किया जा सकता था। हालांकि, फ्लिपकार्ट पर बिक्री शुरू करने के शुरुआती तीन महीने तक नए विक्रेताओं को नई नीति से बाहर रखा गया है।

मामले से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विक्रेताओं को समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए बेहतर योजना बनाने को प्रोत्साहित करना और ग्राहक अनुभव में सुधार करना है। अच्छे अनुपालन वाले विक्रेताओं को भुगतान के तेज निपटान और मुफ्त विज्ञापन क्रेडिट जैसे लाभ भी दिए जा रहे हैं।

‘फोरम फॉर इंटरनेट रीसेलर्स, सेलर्स एंड ट्रेडर्स’ (फर्स्ट इंडिया) के न्यासी विनोद कुमार ने कहा कि ऑनलाइन विक्रेता समय पर ऑर्डर पूरा करने की जरूरत समझते हैं, लेकिन त्योहारी मौसम से पहले प्रमुख ई-कॉमर्स मंचों द्वारा ऑर्डर रद्द होने, डिस्पैच में देरी और अन्य जुर्मानों में वृद्धि छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि हर ऑर्डर के रद्द होने या देरी में विक्रेता की ही गलती नहीं होती है और इसके पीछे लॉजिस्टिक संबंधी समस्या, मंच की तकनीकी दिक्कत, मांग में अचानक वृद्धि या ग्राहक से जुड़े कारण भी हो सकते हैं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय