वैश्विक अनिश्चितता के बीच एफपीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों से तीन दिन में 5,109 करोड़ रुपये निकाले

वैश्विक अनिश्चितता के बीच एफपीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों से तीन दिन में 5,109 करोड़ रुपये निकाले

वैश्विक अनिश्चितता के बीच एफपीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों से तीन दिन में 5,109 करोड़ रुपये निकाले
Modified Date: September 15, 2026 / 04:24 pm IST
Published Date: September 15, 2026 4:24 pm IST

मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) वैश्विक अनिश्चितता के कारण धारणा कमजोर होने के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले तीन दिन में पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) से लगभग 5,109.21 करोड़ रुपये निकाले हैं।

एफएआर के तहत पात्र विदेशी निवेशकों को बिना किसी सीमा के कुछ खास सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने की अनुमति होती है।

भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के अनुसार, एफएआर के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश 15 सितंबर को 3,66,806.286 करोड़ रुपये रहा, जबकि नौ सितंबर को यह 3,71,915.496 करोड़ रुपये था।

आंकड़ों से पता चलता है कि यह निवेश 10 सितंबर को 3,71,520.751 करोड़ रुपये और 11 सितंबर को 3,66,791.286 करोड़ रुपये था।

चॉइस वेल्थ के वाइस चेयरमैन माताप्रसाद पांडेय ने कहा, ‘‘हमने एफएआर मार्ग के तहत जी-सेक में एफपीआई द्वारा उल्लेखनीय बिकवाली देखी। अमेरिका-ईरान युद्ध की बिगड़ती स्थिति के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (जो 110 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं), अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल का पांच प्रतिशत के करीब पहुंचना और रुपये पर लगातार दबाव ने भारतीय सरकारी बॉण्ड को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक बना दिया है।”

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, क्योंकि सऊदी अरब की ‘ईस्ट-वेस्ट’ पाइपलाइन पर हमलों के बाद वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉण्ड में भारी बिकवाली के चलते मानक 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट का प्रतिफल सोमवार को 2023 के बाद पहली बार पांच प्रतिशत को पार कर गया।

उधारी की ऊंची लागत ने ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में ऋण चुकाने के खर्च को भी कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।

आमतौर पर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती ब्याज दरें उनकी वित्तीय संपत्तियों को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे वे उभरते बाजारों से अपना निवेश वापस खींचने लगते हैं।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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