स्वच्छ ऊर्जा की राह में कच्चे माल की उपलब्धता, भंडारण बड़ी चुनौती: आर्थिक समीक्षा
स्वच्छ ऊर्जा की राह में कच्चे माल की उपलब्धता, भंडारण बड़ी चुनौती: आर्थिक समीक्षा
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के व्यापक उपयोग की राह में कच्चे माल की उपलब्धता और ऊर्जा भंडारण की जरूरतें दो बड़ी बाधाओं के रूप में उभरी हैं।
संसद में बृहस्पतिवार को पेश 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत वैश्विक तापमान में वृद्धि को कम करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। इसमें ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, हरित ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता में सुधार शामिल है।
ये रणनीतियां देश के विकास और स्थिरता उद्देश्यों के अनुरूप हैं और 2030 एनडीसी (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नीतियों के अनुसार कदम उठाया जा रहा है।
समीक्षा में कहा गया है कि सरकार परमाणु, सौर, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ऊर्जा बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, गैर-जीवाश्म यानी हरित ईंधन के मामले में प्रगति के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।
इसमें कहा गया है, ‘सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के लिए भारी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। साथ ही इन्हें पारेषण नेटवर्क (ग्रिड) से जोड़ने के लिए भारी निवेश वाली ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की जरूरत है। सामग्री और भंडारण की जरूरतें ही इसके व्यापक विस्तार में मुख्य बाधाएं हैं।’
समीक्षा में यह भी कहा गया है कि यह चुनौती केवल महत्वपूर्ण खनिजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके खनन और प्रसंस्करण के लिए आवश्यक ऊर्जा पर भी इसके निहितार्थ हैं।
समीक्षा के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा की गति बनाए रखने के लिए उच्च पूंजीगत लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी और बिजली पारेषण सुविधाओं की उपलब्धता जैसी समस्याओं को सुलझाना होगा।
इसके अलावा, ‘बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) और ‘पंप्ड स्टोरेज’ जल विद्युत (पीएसपी) के बड़े पैमाने पर एकीकरण से नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता को दूर किया जा सकता है। यह न केवल पारेषण प्रणाली की स्थिरता और अधिकतम मांग के प्रबंधन को सुनिश्चित करेगा, बल्कि एक स्वच्छ, सुरक्षित और मजबूत बिजली आपूर्ति प्रणाली की ओर बढ़ने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के भरोसेमंद और व्यापक उपयोग को भी संभव बनाएगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) का अनुमान है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के सुचारू संचालन के लिए भारत को 2029-30 तक लगभग 336 गीगावाट-घंटा और 2031-32 तक 411 गीगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी।
भाषा सुमित रमण
रमण

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