एक्सिस बैंक को नोटबंदी के दौरान नोट जमा करने से मना करने पर 3.19 करोड़ रुपये देने का आदेश

एक्सिस बैंक को नोटबंदी के दौरान नोट जमा करने से मना करने पर 3.19 करोड़ रुपये देने का आदेश

एक्सिस बैंक को नोटबंदी के दौरान नोट जमा करने से मना करने पर 3.19 करोड़ रुपये देने का आदेश
Modified Date: March 14, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: March 14, 2026 4:25 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक्सिस बैंक को दिल्ली स्थित प्रोकेयर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 3.19 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है।

आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया क्योंकि उसने 2016 के नोटबंदी के दौरान नोटों को जमा करने से मना किया था।

आयोग ने कंपनी की बैंक के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई की। आयोग में पीठासीन सदस्य एवीएम जे. राजेंद्र और न्यायिक सदस्य अनूप कुमार मेंदीरत्ता शामिल थे।

आयोग ने 10 मार्च के आदेश में कहा कि बैंक ने बार-बार अनुरोध के बावजूद शिकायतकर्ता को अपने केवाईसी सत्यापित खाते में नोट जमा करने से रोक दिया और यह समस्या नोटबंदी की पूरी अवधि तक बनी रही।

आयोग ने कहा कि बैंक के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं था कि वह ग्राहक के पैसे जमा करने से सीधे मना कर दे। यदि बैंक को पैसों पर कोई शक था, तो वह इसकी सूचना अधिकारियों को दे सकता था, लेकिन नोट स्वीकार करना बैंक की मुख्य जिम्मेदारी थी।

बैंक द्वारा जमा करने से मना करना कंपनी को नोटबंदी के दौरान एकमात्र वैध अवसर से वंचित करने के बराबर था। इसके कारण कंपनी को नुकसान हुआ, क्योंकि जमा न किए गए नोट समय सीमा समाप्त होने के बाद बेकार हो गए।

आयोग ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से सेवा में कमी के अंतर्गत आता है।

आयोग ने यह भी कहा कि खाते में जमा स्वीकार करना एक मूल बैंकिंग सेवा है और बैंक को कानून के अनुसार काम करना चाहिए। यदि कोई लेनदेन रोकना हो, तो उसका कारण स्पष्ट और नियमों के अनुसार होना चाहिए।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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