बिना आरोप, प्राथमिकी के बैंक खाते पर नहीं लग सकती रोकः उच्च न्यायालय
बिना आरोप, प्राथमिकी के बैंक खाते पर नहीं लग सकती रोकः उच्च न्यायालय
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि बैंक खाता किसी व्यक्ति के आर्थिक अस्तित्व का मूल आधार है और खाताधारक के खिलाफ कोई आरोप, प्राथमिकी (एफआईआर) या न्यायिक आदेश न होने पर उस खाते पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने गुजरात साइबर क्राइम पुलिस की शिकायत पर एक निजी बैंक में एक व्यक्ति के खाते पर रोक लगाने (फ्रीज) से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यह रोक नवंबर, 2024 में लगाई गई थी।
उच्च न्यायालय ने बैंक को खाते पर लगी रोक ‘तत्काल प्रभाव से हटाने’ का निर्देश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को किसी अपराध से जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, लिहाजा उसके खाते पर रोक लगाना पूरी तरह मनमाना था और कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।
अदालत ने चार मई के अपने आदेश में कहा कि गुजरात पुलिस की ओर से कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण खाते को लगातार जब्त रखना उचित नहीं है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का खाता फ्रीज होने से उसका पैसा अटका हुआ है, जबकि उसके खिलाफ न कोई आरोप है, न एफआईआर और न ही कोई न्यायिक आदेश। बिना किसी उचित आधार के खाता फ्रीज करना जीवन के अधिकार में बाधा उत्पन्न करता है।’’
हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि संबंधित एजेंसी द्वारा किसी भी जांच या पूछताछ में वह पूरा सहयोग करे।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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