मुंबई, 24 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 48 प्रतिशत घटकर 1,783 करोड़ रुपये रहा।
लाभ में गिरावट संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एनएमसी समूह मामले में अदालत के बाहर हुए समझौते के तहत 5,680 करोड़ रुपये के भुगतान के कारण आई।
बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक देबदत्त चंद ने कहा कि अदालत के बाहर समझौता करना कई वर्षों से चल रहे जटिल विवाद को समाप्त करने के लिए व्यावसायिक रूप से उचित फैसला था। यह मामला अबू धाबी, इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में चल रहा था।
बैंक ने दो जुलाई को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया था कि उसने एनएमसी हेल्थ पीएलसी, एनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड और एनएमसी होल्डिंग लिमिटेड के साथ अदालत के बाहर समझौता किया है। इसके तहत अबू धाबी शाखा के माध्यम से 60 करोड़ डॉलर (करीब 5,700 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया।
यह मामला अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (एडीजीएम) और ब्रिटेन के दिवाला नियमों तथा यूएई के नागरिक कानून के तहत एनएमसी हेल्थ पीएलसी, एनएमसी होल्डिंग लिमिटेड और एनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड से संबंधित था।
चंद ने कहा कि बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर (बी) जमा के तहत अब तक 70 करोड़ डॉलर जुटा लिए हैं और जुलाई के अंत तक यह राशि एक अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
अप्रैल- जून तिमाही में बैंक की मुख्य शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 12,524 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान ऋण में 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि वैश्विक शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) घटकर 2.77 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 2.91 प्रतिशत था।
चंद ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में बैंक ऋण पोर्टफोलियो में 12-14 प्रतिशत वृद्धि और एनआईएम को 2.75-2.95 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने के लक्ष्य पर कायम है।
बैंक के कुल प्रावधान घटकर 643 करोड़ रुपये रह गए। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह 1,967 करोड़ रुपये थे।
भाषा योगेश रमण
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