बीयर उद्योग में करीब दो अंक की वृद्धि, पर मुनाफे पर दबाव: यूबीएल
बीयर उद्योग में करीब दो अंक की वृद्धि, पर मुनाफे पर दबाव: यूबीएल
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) बीयर बनाने वाली कंपनी यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विवेक गुप्ता ने कहा है कि भारत के बीयर उद्योग में सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है और पिछले कुछ महीनों में बिक्री में करीब दो अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।
गुप्ता ने कहा कि राज्य स्तर पर किए गए सुधारों और अनुकूल मौसम से उद्योग को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने हालांकि कहा कि बिक्री में मजबूत वृद्धि के बावजूद बढ़ी हुई उत्पादन लागत के कारण उद्योग के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
गुप्ता ने एक कार्यक्रम से इतर पीटीआई-भाषा से कहा, ‘बीयर क्षेत्र में रुझान सकारात्मक हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हुए बेहतर सुधारों तथा मौसम की अनुकूल परिस्थितियों से इसे समर्थन मिला है।’
उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्ष के कारण कांच की बोतलों, कैन और आयातित कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी तथा प्रतिकूल विनिमय दर के चलते बीयर उद्योग पर लागत का भारी दबाव है। इससे कारोबार करने की लागत बढ़ गई है।
गुप्ता ने कहा कि बिक्री के स्तर पर उद्योग की स्थिति अच्छी है, हालांकि लाभ मार्जिन पर असर पड़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मुनाफे में सुधार होगा।
उन्होंने कहा, ‘फिलहाल बिक्री में अच्छी तेजी है। साथ ही, युद्ध के प्रभाव के कारण मुनाफे में आई कमी को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है।’
कच्चे माल की लागत के बारे में गुप्ता ने कहा कि युद्ध से जुड़े प्रभावों के कारण कांच की बोतलों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। वहीं, वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये में कमजोरी से कैन की लागत भी बढ़ी है।
बिक्री में वृद्धि की प्रकृति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से मात्रा (वॉल्यूम) में वृद्धि के कारण हो रही है, न कि केवल कीमतों में बढ़ोतरी से।
उन्होंने कहा, ‘हम मात्रा में ऊंची एकल अंक वाली वृद्धि देख रहे हैं। कुछ वृद्धि कीमतों के कारण भी है, लेकिन मुख्य रूप से यह बिक्री मात्रा में बढ़ोतरी से हो रही है।’
उत्तर भारत में जून के दौरान पड़ी असामान्य गर्मी के प्रभाव के बारे में गुप्ता ने कहा कि उद्योग के लिए थोड़े समय के मौसम बदलाव की तुलना में संतुलित मानसून अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि देश में सही और संतुलित मानसून हो, क्योंकि हमारे लिए कुछ दिन की गर्मी की तुलना में अच्छी अर्थव्यवस्था और संतुलित मानसून ज्यादा महत्वपूर्ण है।’
उन्होंने कहा कि मौसम में 10-15 दिन का बदलाव आमतौर पर उद्योग पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं डालता।
भाषा योगेश अजय
अजय

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