बीआईएस ने देसी फसलों के संरक्षण को सामुदायिक बीज बैंक की रूपरेखा जारी की
बीआईएस ने देसी फसलों के संरक्षण को सामुदायिक बीज बैंक की रूपरेखा जारी की
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सामुदायिक बीज बैंक के लिए एक नया स्वैच्छिक प्रबंधन प्रारूप जारी किया है। इसका मकसद पारंपरिक फ़सलों की किस्मों को बचाना है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से देश की कृषि विरासत को खतरा है।
आईएस 20201:2026 मानक में बीज बैंक के कामकाज के पूरे जीवनचक्र (बीज इकट्ठा करने और उनकी क्षमता की जांच से लेकर भंडारण, दस्तावेजीकरण और दोबारा उगाने की प्रक्रियाओं तक) के लिए जरूरी बातें बताई गई हैं। यह बीआईएस पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि देसी बीज की किस्में – जिनमें से कई में सूखा सहने, बीमारी से लड़ने और ज्यादा पोषण मूल्य जैसे गुण होते हैं – अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान से जूझ रही कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम रणनीतिक संसाधन हैं।
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘आईएस 20201:2026 का मकसद विकेंद्रीकृत, समुदाय के नेतृत्व वाले बीज बैंक के लिए एक मानक परिचालन प्रोटोकॉल देकर इन देसी किस्मों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।’’
प्रमाणीकृत होने लायक यह मानक आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज की देखरेख में तैयार किया गया था। इसमें नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी, प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी, रायतू साधिकाड़ा संस्था और बीएआईएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन से जानकारियां ली गई थीं।
यह मौजूदा सरकारी कार्यक्रमों के साथ तालमेल बिठाता है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन शामिल है। यह मिशन सामुदायिक बीज बैंक बनाने के लिए 50 लाख रुपये की एकमुश्त मदद देता है। साथ ही, यह प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स एक्ट, 2001 और बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट, 2002 के तहत कानूनी सुरक्षा भी देता है।
नियमों का पालन करने से सामुदायिक बीज बैंक विकेंद्रीकृत भंडार के तौर पर काम कर सकेंगे, जिससे स्थानीय किसान स्थानीय माहौल के अनुकूल बीज इकट्ठा कर सकेंगे, भंडारण कर सकेंगे और उनका आदान-प्रदान कर सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से छोटे किसानों की आजीविका सुरक्षित होगी और जमीनी स्तर पर खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
बीआईएस कानून, 2016 के तहत स्थापित बीआईएस भारत की राष्ट्रीय मानक संस्था है। सभी सामुदायिक बीज बैंक, सहकारी समितियों और कृषि से जुड़े लोगों को इन दिशानिर्देशों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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