ब्रिक्स ने आईएमएफ, विश्व बैंक में सुधार पर जोर दिया, एकतरफा शुल्क और प्रतिबंधों का विरोध

ब्रिक्स ने आईएमएफ, विश्व बैंक में सुधार पर जोर दिया, एकतरफा शुल्क और प्रतिबंधों का विरोध

ब्रिक्स ने आईएमएफ, विश्व बैंक में सुधार पर जोर दिया, एकतरफा शुल्क और प्रतिबंधों का विरोध
Modified Date: September 12, 2026 / 06:05 pm IST
Published Date: September 12, 2026 6:05 pm IST

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स नेताओं ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया है।

समूह ने एकतरफा शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी आलोचना की।

नयी दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स ने कहा कि बढ़ता संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापार उपाय वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा हैं।

समूह ने कहा, ‘‘हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।’’

ब्रिक्स समूह ने चेतावनी दी कि व्यापार प्रतिबंधात्मक उपायों से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो सकती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापार गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

समूह ने डब्ल्यूटीओ पर केंद्रित नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति समर्थन दोहराते हुए उसके विवाद निपटान तंत्र को तत्काल बहाल करने की मांग की।

घोषणा में कहा गया, ‘‘हम सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के लिए भरोसे और पूर्वानुमेयता के आधार के रूप में सुलभ, प्रभावी और पूरी तरह काम करने वाले दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान तंत्र की तत्काल बहाली की पुरजोर वकालत करते हैं।’’

ब्रिक्स ने डब्ल्यूटीओ की अपीलीय संस्था के नए सदस्यों की नियुक्ति भी बिना और देरी के करने का आह्वान किया। समूह ने डब्ल्यूटीओ में शामिल होने के लिए इथियोपिया और ईरान की कोशिशों का समर्थन किया तथा चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-शुल्क व्यवस्था के विस्तार का उल्लेख किया।

समूह ने एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की। घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा जबरन उपायों को लागू किए जाने की निंदा की जाती है।

समूह के अनुसार, ऐसे उपाय लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों, विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

ब्रिक्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अधिकृत नहीं किए गए प्रतिबंधों सहित ऐसे एकतरफा जबरन उपायों को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ के सिद्धांतों और उद्देश्यों को कमजोर करते हैं।

घोषणा में ‘ब्रेटन वुड्स संस्थानों (बीडब्ल्यूआई)’, मुख्य रूप से आईएमएफ और विश्व बैंक, की शासन व्यवस्था में भी सुधार की मांग की गई।

ब्रिक्स ने कहा कि इन संस्थानों की शासन व्यवस्था में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलावों को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए और उभरते बाजारों तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और प्रतिनिधित्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी स्थिति के अनुरूप होना चाहिए।

ब्रिक्स ने आईएमएफ और विश्व बैंक के नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया में भी बदलाव का आह्वान किया। समूह ने योग्यता आधारित, समावेशी और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग की, जिससे इन संस्थानों के नेतृत्व में क्षेत्रीय विविधता तथा उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ सके।

समूह ने आईएमएफ को वैश्विक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के केंद्र में मजबूत और पर्याप्त रूप से वित्तपोषित संस्था बनाए रखने के लिए ‘ब्रिक्स रियो डी जेनेरियो विजन फॉर आईएमएफ कोटा एंड गवर्नेंस रिफॉर्म’ के प्रति समर्थन दोहराया।

ब्रिक्स ने आईएमएफ के कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा के तहत तय बढ़ोतरी को बिना और देरी के लागू करने तथा 17वीं सामान्य समीक्षा के तहत कोटा में सार्थक बदलाव के उपाय जल्द विकसित करने का आह्वान किया।

घोषणा में कहा गया कि कोटा में बदलाव से उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की कोटा तथा मतदान हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए, लेकिन इसका बोझ गरीब विकासशील देशों पर नहीं पड़ना चाहिए।

समूह ने यह भी कहा कि आईएमएफ में स्वैच्छिक वित्तीय योगदान से किसी देश के कोटा, शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व और मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

विश्व बैंक के संबंध में ब्रिक्स ने कहा कि 2025 की शेयरधारिता समीक्षा से संस्था को मजबूत करने और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के कम प्रतिनिधित्व को दूर करने में मदद मिलनी चाहिए।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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