सीबीआईसी ने अपने पोर्टल पर यूपीआई, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सीमा शुल्क भुगतान की अनुमति दी

सीबीआईसी ने अपने पोर्टल पर यूपीआई, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सीमा शुल्क भुगतान की अनुमति दी

सीबीआईसी ने अपने पोर्टल पर यूपीआई, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सीमा शुल्क भुगतान की अनुमति दी
Modified Date: March 25, 2026 / 06:09 pm IST
Published Date: March 25, 2026 6:09 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा है कि अब कंपनियां विभाग के !‘आइसगेट’ पोर्टल पर सीमा शुल्क का भुगतान करने के लिए यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकती हैं।

सीबीआईसी ने एक परिपत्र में कहा कि आइसगेट (भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे) ई-भुगतान मंच ने सीमा शुल्क भुगतान को सुविधाजनक बनाने के लिए ‘पेमेंट एग्रीगेटर’ को एक अधिकृत माध्यम के रूप में सक्षम किया है।

आइसगेट मूल रूप से भारतीय सीमा शुल्क के लिए महत्पूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में कार्य करता है। यह एक ऐसे इंटरफेस के रूप में काम करता है जिसके माध्यम से आयातक और निर्यातक दस्तावेज दाखिल करते हैं, मंजूरी पर नजर रखते हैं और शुल्क भुगतान करते हैं। हालांकि, समय के साथ प्रणाली में काफी विकास हुआ है, भुगतान व्यवस्था काफी हद तक सीमित संख्या में अधिकृत बैंकों और नेट बैंकिंग तथा एनईएफटी/आरटीजीएस जैसे पारंपरिक चैनलों तक ही सीमित रही है।

कर और परामर्श कंपनी एकेएम ग्लोबल के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख इकेश नागपाल ने कहा, ‘‘आइसगेट पर पेमेंट एग्रीगेटर की पेशकश के साथ, शुल्क भुगतान अब विशिष्ट बैंकिंग चैनल तक सीमित नहीं रह गए हैं। कंपनियां अब यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकती हैं और एक व्यापक बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंच सकती हैं, जिससे भुगतान करने और लेनदेन का प्रबंधन करने में अधिक आसानी और सुविधा मिलती है।’’

इससे बैंकों के सीमित समूह पर निर्भरता कम होगी। विशेष रूप से समय के हिसाब से संवेदनशील मंजूरी के मामलों में, अधिक लचीलापन और गति आएगी।

नागपाल ने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीआई की शुरुआत एक महत्वपूर्ण सुविधा है क्योंकि यह सरल, व्यापक रूप से सुलभ है और इसमें आमतौर पर लेनदेन लागत शामिल नहीं होती है, जिससे छोटे करदाताओं को काफी लाभ होता है। यह कारोबार सुगमता को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

ईवाई इंडिया के कर भागीदार विमल प्रुथी ने कहा कि यह सुधार आयातकों और निर्यातकों के लेनदेन को सरल बनाता है, मंजूरी प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को कम करता है और नकदी प्रवाह प्रबंधन में अधिक गति और पारदर्शिता लाता है…और व्यापार को सुगम बनाने और कारोबार करने में आसानी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

भाषा रमण अजय

अजय


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