सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिक्री पेशकश को संस्थागत निवेशकों से दो गुना बोलियां मिलीं
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिक्री पेशकश को संस्थागत निवेशकों से दो गुना बोलियां मिलीं
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में सरकार की चार प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बिक्री पेशकश को संस्थागत निवेशकों से शुक्रवार को 2,380 करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलीं।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में सरकार आठ प्रतिशत तक हिस्सेदारी 31 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर बेच रही है। यदि सभी हिस्सेदारी बिक जाती है तो सरकार को इससे 2,456 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को कारोबार बंद होने तक 76.86 करोड़ से अधिक शेयर के लिए बोली लगाई, जो कि पेश किए गए 32.58 करोड़ शेयर का करीब 2.36 गुना है। यानी 31.01 रुपये प्रति शेयर के निर्धारित मूल्य पर गैर-खुदरा निवेशकों ने 2,380 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बोलियां लगाईं।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इस बिक्री पेशकश (ओएफएस) में अतिरिक्त चार प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीनशू यानी अधिक बोली आने पर उसे रखने का विकल्प शामिल है। खुदरा निवेशक इस शेयर बिक्री में सोमवार को बोली लगा सकेंगे।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार की पहली बिक्री पेशकश है।
यह 31 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य बृहस्पतिवार को बीएसई पर शेयर के 33.91 रुपये के बंद भाव से 8.58 प्रतिशत कम है।
बीएसई पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शेयर बृहस्पतिवार के बंद भाव के मुकाबले 7.20 प्रतिशत टूटकर 31.30 रुपये पर बंद हुआ।
इस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आठ प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को 2,456 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
यह बिक्री पेशकश सरकार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी मानक को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी।
सेबी के अनुसार, सभी सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी होना अनिवार्य है।
सरकार के पास वर्तमान में 89.27 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यदि सरकार ग्रीनशू विकल्प का उपयोग करती है, तो बैंक में उसकी हिस्सेदारी घटकर 81.27 प्रतिशत रह जाएगी।
सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में बिक्री पेशकश के जरिये बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 2,624 करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक से 1,419 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
चालू वित्त वर्ष में सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश एवं परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से 80,000 करोड़ रुपये जुटाना है जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों में निर्धारित 33,837 करोड़ रुपये से अधिक है।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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