नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार से हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नियम और प्रोत्साहन का खाका तैयार करने का अनुरोध किया है।
हरित हाइड्रोजन ऐसा स्वच्छ ईंधन है, जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता और पारंपरिक हाइड्रोजन की जगह उद्योगों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उद्योग मंडल ने सुझाव दिया है कि रिफाइनिंग, उर्वरक और गैस उत्पादन जैसे बड़े उद्योगों में हरित हाइड्रोजन को मिलाकर इस्तेमाल किया जाए।
इसके लिए सरकार कार्बन क्रेडिट (उत्सर्जन घटाने पर लाभ), सब्सिडी और उत्पादन लागत कम करने जैसे उपायों के जरिये उद्योगों को मदद भी दे सकती है। इससे हरित हाइड्रोजन सस्ता होगा और ज्यादा उद्योग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत ने पिछले साल स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाया, जब देश में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की कुल क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि अब अगला कदम हरित हाइड्रोजन जैसी नई प्रौद्योगिकी को अपनाना है।
उद्योग मंडल ने यह भी सुझाव दिया कि रेलवे, सड़क, आवास और पुल निर्माण जैसी सार्वजनिक ढांचागत परियोजनाओं में हरित हाइड्रोजन से तैयार 10-15 प्रतिशत इस्पात, अमोनिया एवं सीमेंट की खरीद को अनिवार्य किया जा सकता है। इससे मांग बढ़ेगी, कीमत कम होगी और निवेशकों को भरोसा मिलेगा।
उद्योग संगठन ने छोटे उद्योगों के लिए औद्योगिक हाइड्रोजन संकुल बनाने और दूसरे देशों के साथ समझौते कर निर्यात बढ़ाने की भी सिफारिश की।
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प्रेम रमण
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