कंपनियों ने ‘कमर्शियल पेपर’ जारी कर जून में पांच साल की सर्वाधिक राशि जुटाई
कंपनियों ने ‘कमर्शियल पेपर’ जारी कर जून में पांच साल की सर्वाधिक राशि जुटाई
मुंबई, छह जुलाई (भाषा) अनुकूल लागत, मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरत और पुराने कर्ज के पुनर्वित्त के कारण भारतीय कंपनियों ने जून में कमर्शियल पेपर (सीपी) के जरिये करीब पांच साल में सबसे ज्यादा धन जुटाया।
कमर्शियल पेपर कंपनियों द्वारा सात दिन से लेकर एक साल की अल्पावधि के लिए पैसा जुटाने का एक अल्पकालिक ऋण साधन है।
प्राइम डाटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों ने जून में सीपी जारी करते हुए 2.53 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो मई के 1.37 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 84.6 प्रतिशत अधिक है। सालाना आधार पर भी यह 59.4 प्रतिशत बढ़कर जून, 2025 के 1.59 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा।
आंकड़ों से पता चलता है कि जून, 2026 का यह आंकड़ा जुलाई, 2021 के 2.69 लाख करोड़ रुपये के बाद सबसे अधिक जुटाई गई राशि है।
करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वी. रामचंद्र रेड्डी ने कहा, “जहां लागत अनुकूल रही, वहां कंपनियों ने बैंक ऋण के मुकाबले कमर्शियल पेपर जारी करने को प्राथमिकता दी। कई जारीकर्ताओं ने अपने मौजूदा कर्जों का पुनर्वित्तपोषण किया और एहतियाती नकदी भंडार भी बनाए। ब्याज दरों में नरमी और पर्याप्त नकदी की उम्मीदों ने भी इसको बढ़ावा दिया।”
धनलक्ष्मी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख बालासुब्रमण्यम आर ने कहा कि कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने महंगे बैंक ऋण के बजाय कम लागत वाले अल्पकालिक बाजार साधनों का अधिक उपयोग किया।
उन्होंने कहा, “उधारकर्ताओं ने मौसमी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सीपी बाजार का रुख किया, जिसे निवेशकों की मजबूत मांग और स्थिर ऋण स्थितियों का समर्थन मिला।”
जून के शुरुआती चरण में इन ऋण साधनों पर प्रतिफल कड़े रहे, लेकिन बाद में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार अस्थायी नकदी डालने के बाद इसमें नरमी आई।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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