रक्षा खरीदारी में भारतीयों के नियंत्रण वाली कंपनियों को तरजीह दी जाए:स्वदेशी जागरण मंच

रक्षा खरीदारी में भारतीयों के नियंत्रण वाली कंपनियों को तरजीह दी जाए:स्वदेशी जागरण मंच

रक्षा खरीदारी में भारतीयों के नियंत्रण वाली कंपनियों को तरजीह दी जाए:स्वदेशी जागरण मंच
Modified Date: November 29, 2022 / 08:01 pm IST
Published Date: September 1, 2020 2:06 pm IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने मंगलवार को सरकार की प्रस्तावित ‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया’ नियमों में बदलाव की मांग करते हुये कहा कि इसमें उपलब्ध लाभ केवल भारत में रहने वाले नागरिकों के बहुलांश स्वामित्व व नियंण वाली कंपनियों को ही मिलना चाहिये।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे एक पत्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े इस संगठन ने कहा है कि इस मामले में कंपनियों को केवल भारत में पंजीकृत होने के नाते भारतीय नागरिक द्वारा प्रवर्तित कंपनी के मुकाबले कोई अधिक लाभ नहीं दिया जा सकता है।

स्वदेशी जागरण मंच के सह- संयोजक अश्विनी महाजन ने पत्र में कहा है, ‘‘हमारा यह मानना है कि भारत में पंजीकृत ऐसी कंपनियां जिनकी बहुलांश हिस्सेदारी विदेशियों के हाथ में है ऐसी कंपनियों से खरीदारी करना आयात करने के समान ही होगा।’’

सरकार द्वारा 101 हथियारों का आयात बंद करने के फैसले की सराहना करते हुये महाजन ने कहा कि कोई भी विदेशी कंपनी भारत में पंजीकृत हो सकती है और किसी भी भारतीय कंपनी में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीद सकती है। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के तहत स्वत: मंजूरी मार्ग के तहत यह अनुमति दी गई है।

महाजन ने कहा कि इस तरह से कोई भी विदेशी कंपनी रक्षा खरीद के मामले में वहीं लाभ उठा सकती है जो कि भारतीय कंपनियों के हित में होना चाहिये। सरकार की रक्षा खरीद क्षेत्र में घरेलू स्तर पर डिजाइन, विकसित और विनिर्मित भारतीय (आईडीडीएम) रूपरेखा ढांचे का यही मकसद होना चाहिये।

एसजेएम का कहना है कि रक्षा खरीद सौदों में 51 प्रतिशत अथवा इससे अधिक स्थानीय हिस्सेदारी वाली कंपनियों को तरजीह दी जानी चाहिये। इस लिहाज से प्रस्तावित रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के नियमों में ‘भारतीय विक्रेता’ की परिभाषा में बदलाव करते हुये उसमें सही मायनों में भारतीय कंपनियों को तरजीह मिलनी चाहिये और विदेशी कंपनियों इसका फायदा नहीं उठा ले जायें इसका ध्यान रखना होगा।

पत्र में कहा गया है कि एसजेएम का मानना है कि ‘भारतीय विक्रेता’ से तात्पर्य केवल ऐसी भारतीय कंपनी से होना चाहिये जिसमें बहुलांश हिस्सेदारी भारत में रहने वाले नागरिक के पास हो।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले महीने ही रक्षा क्षेत्र में 101 शस्त्रों और प्लेटफार्म्स के आयात पर 2024 तक धीरे धीरे रोक लगाने की महत्वकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस पहल का मकसद प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर भारत मिशन योजना के तहत घरेलू सतर पर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भाषा

महाबीर मनोहर

मनोहर


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