प्रतिस्पर्धा आयोग ने 12 अस्पतालों के खिलाफ 10 साल पुराने मामले का निपटान किया
प्रतिस्पर्धा आयोग ने 12 अस्पतालों के खिलाफ 10 साल पुराने मामले का निपटान किया
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने राष्ट्रीय राजधानी के 12 अस्पतालों के खिलाफ 10 साल से अधिक पुराने मामले का निपटारा करते हुए उन्हें बंद कर दिया। इसमें उसे बाजार में मजबूत स्थिति के दुरुपयोग का कोई सबूत नहीं मिला।
यह निर्णय आयोग ने महानिदेशक (डीजी) द्वारा प्रस्तुत जांच तथा अनुपूरक जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद लिया। इसमें उपभोग्य वस्तुओं, दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की कीमतों सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया था। यह जानकारी सीसीआई द्वारा बृहस्पतिवार को पारित आदेशों में दी गई।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग इस तरह से ऐसे किसी मामले को बंद नहीं करता है जिसमें डीजी की जांच में प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन के निष्कर्ष निकले हों या मामलों में प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलते हों। ऐसे मामलों को विस्तृत जांच के लिए डीजी को भेजा जाता है।
वर्तमान में 12 अस्पतालों पर प्रभुत्व के दुरुपयोग के आरोप वाला मामला बंद कर दिया गया है। इनमें मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (पटपड़गंज), मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (साकेत) और मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (शालीमार बाग) शामिल हैं।
अन्य अस्पतालों में बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (नयी दिल्ली), मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर (पंचशील पार्क), मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर (पीतमपुरा), फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल (वसंत कुंज), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड (नयी दिल्ली) सर गंगाराम अस्पताल (नयी दिल्ली), इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल), सेंट स्टीफंस अस्पताल (दिल्ली) और सीएच ऐशी राम बाटरा पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का बाटरा अस्पताल एवं मेडिकल रिसर्च सेंटर (नयी दिल्ली) शामिल हैं।
शिकायत मिलने के बाद सीसीआई ने नवंबर 2015 में अपने महानिदेशक को जांच का आदेश दिया था और बाद में अगस्त 2018 में अनुपूरक जांच कराई गई। इसके बाद डीजी ने सितंबर 2024 में 12 संशोधित अनुपूरक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कीं।
सीसीआई ने कहा कि 12 अलग-अलग लेकिन समान शब्दों वाले आदेशों में यह पाया गया कि यूनाइटेड ब्रांड्स (सुप्रा) में निर्धारित दोनों परीक्षण किसी भी आधार पर सिद्ध नहीं होते, जैसा कि डीजी द्वारा अनुपूरक जांच में एकत्र किए गए साक्ष्यों से स्पष्ट है।
डीजी, आयोग की जांच इकाई है।
डीजी रिपोर्ट के बारे में आयोग ने कहा कि उल्लंघन का निष्कर्ष केवल इस अवलोकन पर आधारित था कि अस्पतालों ने ‘उच्च कीमतें’ वसूलीं और उनके ‘मुनाफे काफी अधिक’ थे। हालांकि अत्यधिक मूल्य निर्धारण से संबंधित कानूनी मानकों का सही प्रयोग नहीं किया गया, जैसा कि आयोग और अन्य न्यायक्षेत्रों में स्थापित है।
प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4 के तहत केवल अत्यधिक मूल्य लेना अवैध नहीं है बल्कि ऐसा मूल्य जो अनुचित हो, वह अवैध माना जाता है।
आयोग ने कहा कि जांच के तहत यह तय किया जाना होता है कि क्या कीमत स्वयं में अनुचित है या प्रतिस्पर्धी उत्पादों की तुलना में अनुचित है। हालांकि डीजी ने यूनाइटेड ब्रांड्स में निर्धारित कानूनी मानकों को लागू नहीं किया और अत्यधिक मूल्य निर्धारण को ही अनुचित मान लिया।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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