मिट्टी की सेहत सुधारने को गांव-स्तर पर बने ‘कम्पोस्ट’ इकाई
मिट्टी की सेहत सुधारने को गांव-स्तर पर बने ‘कम्पोस्ट’ इकाई
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) पद्म पुरस्कार से सम्मानित किसानों और खेती के जानकारों ने शुक्रवार को ‘जहर-मुक्त खेती-बाड़ी को बढ़ावा देने वाले स्कूल’ बनाने, गौशालाओं को जैविक खाद की इकाई के तौर पर ढालने और गांव-स्तर पर ‘कम्पोस्ट’ खाद की उपलब्धता पक्का करने की बात कही, ताकि खाद का संतुलित इस्तेमाल बढ़ाया जा सके और मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से रोका जा सके।
एक सरकारी बयान में कहा गया कि शास्त्री भवन में उर्वश्रक मंत्रालय की तरफ से बुलाए गए एक सत्र में, जानकारों ने ‘ज्यादा उर्वरक मतलब ज्यादा मुनाफा’ वाली सोच के खिलाफ चेताया और संतुलित खाद इस्तेमाल और फसल विविधीकरण पर किसानों को सही ढंग से जानकारी देने की जरूरत पर जोर दिया।
उर्वरक मंत्रालय के सचिव, रजत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा के नेतृत्व में हुई यह उच्च स्तरीय परामर्श बैठक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘धरती बचाओ’ के आह्वान के मुताबिक, मिट्टी की सेहत को देश भर में एक आंदोलन के तौर पर मजबूत करने की सरकार की कोशिश का हिस्सा है।
पद्म पुरस्कार से सम्मानित, उमाशंकर पांडेय ने किसानों को टिकाऊ तरीकों के बारे में बताने के लिए ‘जहर-मुक्त कृषि स्कूल’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा और सभी राज्यों में संबंधित विभाग के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
राम शरण वर्मा ने फसल चक्र और विविधीकरण के महत्व पर जोर दिया, हरित खाद को बढ़ावा देने, उर्वरक बैग के आकार को सही करने और ज्यादा उर्वरक के इस्तेमाल को लेकर किसानों की सोच बदलने की सलाह दी।
भारत भूषण त्यागी ने वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और गांव स्तर पर ‘कम्पोस्ट’ (जैविक खाद) की उपलब्धता पक्का करने की वकालत की, और कहा कि ‘‘फसल का बचा हुआ हिस्सा खुशहाली की नींव है’’ जो संदेश हर किसान तक पहुंचना चाहिए।
सेठ पाल सिंह ने ज्यादा उर्वरकों की बिक्री के दबाव को एक वजह बताया और खेती की जमीन के लिए ज्यादा से ज्यादा उर्वरक की जरूरत का सही अंदाजा लगाने के साथ-साथ किसानों को सही जानकारी देने की बात कही।
कंवल सिंह ने गौशालाओं को जैविक खाद बनाने वाली इकाई के बतौर विकसित करने और स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाली खेती के लिए एक सुसंगठित श्रृंखला के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए संकुल बनाने का सुझाव दिया।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि गांव स्तर पर खाद और खाद की स्थानीय उपलब्धता पक्का करने से संतुलित और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

Facebook


