Smita Uday Wagh Cancer: कैंसर के बावजूद संसद पहुँच रही हैं BJP की ये महिला सांसद.. कहा, “जब तक मैं जीवित हूं, अपने लोगों के लिए काम करूंगी”..

Smita Uday Wagh Cancer: जलगांव सांसद स्मिता उदय वाघ स्टेज-1 कैंसर के बावजूद संसद में सक्रिय, सर्जरी और कीमोथेरेपी के बाद भी निभा रहीं दायित्व।

Smita Uday Wagh Cancer: कैंसर के बावजूद संसद पहुँच रही हैं BJP की ये महिला सांसद.. कहा, “जब तक मैं जीवित हूं, अपने लोगों के लिए काम करूंगी”..

Smita Uday Wagh Cancer || Image- ANI News File

Modified Date: February 13, 2026 / 09:49 pm IST
Published Date: February 13, 2026 8:52 pm IST
HIGHLIGHTS
  • स्टेज-1 कैंसर के बावजूद संसद में सक्रिय
  • सर्जरी और कीमोथेरेपी करवा चुकीं सांसद
  • क्षेत्र की आवाज उठाना बताया कर्तव्य

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जलगांव से सांसद स्मिता उदय वाघ ने स्टेज-1 कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद संसद की कार्यवाही में पूरी सक्रियता से हिस्सा ले रही हैं। (Smita Uday Wagh Cancer) न्यूज एजेंसी ANI से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि अपने चुनावी क्षेत्र की जनता की आवाज उठाना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है और इसी वजह वे नियमित रूप से संसद में मौजूद रह रही हैं।

दिवाली पर डिटेक्ट हुआ कैंसर

एएनआई से बातचीत में वाघ ने बताया कि पिछली दिवाली के आसपास उन्हें शरीर में कुछ असाधारण महसूस हुआ। पारिवारिक डॉक्टर से सलाह के दौरान उन्होंने मैमोग्राफी करवाई, जिसमें स्टेज-1 कैंसर का पता चला। इसके बाद वे मुंबई गईं और सर्जरी करवाई। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी की सलाह दी, जिसे उन्होंने पूरा किया।

‘काम करने से मिलती है मानसिक शक्ति’ : सांसद स्मिता

वाघ ने कहा कि सर्जरी सहनीय थी, लेकिन कीमोथेरेपी काफी दर्दनाक रही। उनका आखिरी कीमोथेरेपी सत्र 30 तारीख को हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली हर परिस्थिति का सकारात्मकता के साथ सामना करना चाहिए और काम करते रहने से उन्हें मानसिक शक्ति मिलती है।

अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे एबीवीपी के समय से सक्रिय हैं और कभी निष्क्रिय नहीं रहीं। (Smita Uday Wagh Cancer) संसद को उन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने का सबसे प्रभावी मंच बताया। उनका कहना है कि सत्र से अनुपस्थित रहना उनके लिए संभव नहीं था।

चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आराम की जरूरत होने के बावजूद वाघ संसद में बहसों में हिस्सा ले रही हैं और प्रश्न भी उठा रही हैं। वे खासतौर पर ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दे रही हैं। सहकर्मियों के अनुसार, उन्होंने इलाज और अपने संसदीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखा है।

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