उपभोक्ता अदालत ने अंतिम समय में उड़़ान रद्द होने पर मुआवजे का आदेश दिया
उपभोक्ता अदालत ने अंतिम समय में उड़़ान रद्द होने पर मुआवजे का आदेश दिया
मुंबई, 16 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के एक उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि उड़ान रद्द करने के बाद उसके समय में बदलाव का उल्लेख कर यात्रियों को ‘हवाई अड्डे पर न पहुंचने’ की श्रेणी में डाल देना अनुचित व्यापार प्रथा है।
इसके साथ ही उपभोक्ता आयोग ने अब बंद हो चुकी गो एयरलाइंस को प्रभावित यात्री को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अगर कोई कंपनी पहले उड़ान रद्द होने की जानकारी दे और बाद में उसे समय बदलना (रीशेड्यूल) बताकर पैसे लौटाने से बचने की कोशिश करे, तो यह गलत है।
इसी तरह यात्री को ‘नो-शो’ श्रेणी में डालने का मतलब है कि यात्री खुद उड़ान के लिए नहीं आया, जबकि इस मामले में उड़ान पहले ही रद्द की जा चुकी थी।
आयोग ने एयरलाइन को 63,161 रुपये का टिकट किराया 18 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने और 25,000 रुपये मानसिक परेशानी के लिए यात्री को देने का आदेश दिया। साथ ही 20,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने को भी कहा।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड में पदस्थ शिकायतकर्ता ने 26 दिसंबर, 2019 के लिए गोवा से चंडीगढ़ की टिकट बुक की थी। उड़ान से करीब तीन घंटे पहले उन्हें संदेश मिला कि उड़ान रद्द हो गई है और उन्हें पैसे वापस लेने या दूसरी तारीख चुनने का विकल्प दिया गया।
चंडीगढ़ पहुंचना जरूरी होने के कारण उन्होंने करीब 97,566 रुपये में दूसरी उड़ान बुक की। बाद में जब उन्होंने गो एयरलाइंस से रिफंड मांगा तो कहा गया कि उड़ान को रद्द न कर सिर्फ समय बदला गया था, और यात्रियों को “नो-शो” बता दिया।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

Facebook


