देश को 2035-36 तक 100 गीगावाट पंप्ड भंडारण बिजली परियोजनाओं की जरूरतः सीईए
देश को 2035-36 तक 100 गीगावाट पंप्ड भंडारण बिजली परियोजनाओं की जरूरतः सीईए
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने शुक्रवार को कहा कि देश की ऊर्जा भंडारण जरूरत वित्त वर्ष 2029-30 तक 62 गीगावाट और 2034-35 तक 161 गीगावाट हो जाने का अनुमान है जिससे 2035-36 तक 100 गीगावाट की पंप्ड भंडारण पनबिजली परियोजनाएं अनिवार्य हो जाएंगी।
बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीईए की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने दो-दिवसीय चिंतन शिविर में ‘2035-36 तक 100 गीगावाट की पंप्ड भंडारण पनबिजली परियोजनाओं की रूपरेखा’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट जारी की।
इस अवसर पर बिजली मंत्री ने कहा कि केंद्र, राज्य और उद्योगों के बीच करीबी समन्वय और समयबद्ध सुधारों की कार्यान्वयन योजना जरूरी है ताकि भारत बिजली क्षेत्र में अग्रणी बने।
रिपोर्ट में 2030 तक 500 गीगावाट और 2035 तक 701 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के विस्तार को देखते हुए ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग को पूरा करने की रूपरेखा दी गई है।
इसके अनुसार, 2029-30 तक 62 गीगावाट और 2034-35 तक 161 गीगावाट भंडारण की जरूरत होगी, जिससे 2035-36 तक 100 गीगावाट पंप्ड भंडारण परियोजना का लक्ष्य तय हुआ। इसमें वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन, राज्यवार संभावनाओं की पहचान और चरणबद्ध क्षमता संवर्द्धन योजना प्रस्तावित की गई है।
शिविर में वितरण कंपनियों की 14वीं रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट भी जारी की गई। इसमें 65 बिजली वितरण (डिस्कॉम) कंपनियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से 31 को ए+ या ए रेटिंग मिली है।
टोरेंट पावर अहमदाबाद और टोरेंट पावर सूरत ने डिस्कॉम की रैंकिंग में 2024-25 के दौरान शीर्ष स्थान हासिल किया। सरकारी-स्वामित्व वाली डिस्कॉम में उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (यूजीवीसीएल) को सबसे अच्छी रेटिंग मिली है।
इस शिविर में 2026 के मसौदा बिजली संशोधन विधेयक और मसौदा बिजली नीति, 2026 पर भी चर्चा की गई।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण


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