देश को उर्वरक आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत: आईसीएआर प्रमुख
देश को उर्वरक आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत: आईसीएआर प्रमुख
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम एल जाट ने मंगलवार को कहा कि उर्वरक आयात पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए अल्प, मध्यम और दीर्घावधिक रणनीति वाले एक व्यापक रूख की जरूरत है।
उन्होंने उर्वरक के इस्तेमाल को अधिकतम करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई), विशिष्ट पोषण प्रबंधन और सेंसर-आधारित प्रणाली के ज्यादा इस्तेमाल की अपील की।
नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (एनएएएस) द्वारा यहां उर्वरक में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने के लिए रूपरेखा तैयार करने के लिए आयोजित एक सत्र के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जाट ने कहा कि हरित क्रांति के दौरान उत्पादन बढ़ाने में उर्वरक की अहम भूमिका थी, लेकिन मौजूदा चुनौती उर्वरक के इस्तेमाल की घटती क्षमता और उनके बिना सोचे-समझे इस्तेमाल की है।
उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम जैसी पहल को मजबूत करना, संतुलित और जरूरत के हिसाब से उर्वरक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और किसानों में जागरूकता बढ़ाना सही दिशा में जरूरी कदम हैं। जाट ने कहा कि दाल और तिलहन की तरफ फसल विविधीकरण, कूड़ा-से-संपदा पहल के तहत जैव कचरे का पुनर्चक्रण करना और जैविक स्रोत का इस्तेमाल बढ़ाना रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता कम करने में और मदद करेगा।
इस सत्र में संबंधित सरकारी विभाग, उर्वरक उद्योग और किसानों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने एकमत होकर इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया।
एक सरकारी बयान में कहा गया कि प्रतिभागियों ने अल्प, मध्यम और दीर्घावधिक शोध एवं विकास लक्ष्य के साथ एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाने की सलाह दी।
भारत का उर्वरक सब्सिडी का बोझ वित्तवर्ष 2024-25 में लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मुख्य रूप से फॉस्फोरस और पोटेशियम के लिए भारी आयात पर निर्भरता के कारण हुआ। इसके कारण ज्यादा विदेशीमुद्रा खर्च हुआ।
वित्त वर्ष 2024-25 में कुल उर्वरक खपत 3.29 करोड़ टन तक पहुंच गई, जिसमें उर्वरक उपयोग गहनता 151 किग्रा प्रति हेक्टेयर थी।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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