देश का निर्यात मई में 45.2 अरब डॉलर के छह माह के उच्च स्तर पर, व्यापार घाटा बढ़ा

देश का निर्यात मई में 45.2 अरब डॉलर के छह माह के उच्च स्तर पर, व्यापार घाटा बढ़ा

देश का निर्यात मई में 45.2 अरब डॉलर के छह माह के उच्च स्तर पर, व्यापार घाटा बढ़ा
Modified Date: June 15, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: June 15, 2026 5:53 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) देश का निर्यात मई में 18 प्रतिशत बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर 45.2 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में वृद्धि से व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर तक बढ़ गया।

मासिक आधार पर हालांकि व्यापार घाटा अप्रैल के 28.38 अरब डॉलर से मामूली घटा है। पिछले वर्ष मई में व्यापार घाटा 21.88 अरब डॉलर था।

आयात मई में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे पिछले वर्ष की तुलना में व्यापार घाटा और बढ़ गया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश का निर्यात अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मई के आंकड़े ‘‘ सबसे अधिक मासिक निर्यात आंकड़ों में से एक’’ हैं और रुझान को देखते हुए यह वर्ष निर्यात के लिए अच्छा रहेगा।

निर्यात में योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं एवं औषधि हैं।

अप्रैल-मई के दौरान निर्यात 16.09 प्रतिशत बढ़कर 88.91 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 15.14 प्रतिशत बढ़कर 145.35 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। व्यापार घाटा 56.44 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में सोने का आयात 60 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। कच्चे तेल का आयात 16.5 प्रतिशत बढ़कर 41.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

अग्रवाल ने कहा कि इस वर्ष मई में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात लगभग पिछले वर्ष के समान स्तर पर पहुंच गया, जबकि उस क्षेत्र में व्यवधान बने रहे।

भारत का पश्चिम एशिया को निर्यात मई में मामूली घटकर 5.30 अरब डॉलर रहा, जबकि मई 2025 में यह 5.38 अरब डॉलर था। भारत ने इस क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने के लिए ओमान के तीन बंदरगाहों (दुक्म, सोहर तथा सलालाह) का इस्तेमाल किया है।

यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 107 दिन के युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौता होने की घोषणा की है। इस युद्ध से ही वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा हुआ था। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य सहित अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया।

इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस बीच, सरकारी अनुमान के अनुसार मई में सेवाओं का निर्यात 36.76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 19.06 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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