दिल्ली आग: उद्योग संगठन सीटआई ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की
दिल्ली आग: उद्योग संगठन सीटआई ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) उद्योग संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर शहर के होटलों, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल और सिनेमा हॉल में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की है। यह मांग मालवीय नगर अग्निकांड के बाद की गई जिसमें कम से कम 21 लोगों की जान गई है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि कार्रवाई केवल होटल मालिक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि उल्लंघन हुआ है, तो अग्निशमन विभाग, नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और विद्युत विभाग के वे अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए जाएं जो निगरानी के लिए उत्तरदायी हैं।
सीटीआई ने कहा कि इस घटना ने वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है और सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
गोयल ने सवाल उठाया कि जिस प्रतिष्ठान में आग लगी, वह कथित रूप से बिना अग्निशमन विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के कैसे चल रहा था और छह कमरों के लिए स्वीकृत संपत्ति को कथित तौर पर 25 कमरों तक कैसे बढ़ा दिया गया।
संस्था ने दिल्ली सरकार को आठ बिंदुओं की सुरक्षा योजना भेजी है और कहा है कि यदि इसे लागू किया जाए तो भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
सिफारिशों के तहत सीटीआई ने कहा कि रसोई में तंदूर, डीप फ्रायर और गैस चूल्हों के ऊपर स्वचालित अग्निशमन प्रणाली लगाई जानी चाहिए, क्योंकि तेल में लगी आग को पानी से नियंत्रित नहीं किया जा सकता और इसके लिए विशेष फोम या रसायन आधारित प्रणाली की जरूरत होती है। साथ ही हर तीन महीने में ‘एग्जॉस्ट हुड’ की गहन सफाई की जानी चाहिए ताकि जमी चिकनाई हटाई जा सके, जो आग पकड़ सकती है।
संस्था ने एलपीजी और पीएनजी पाइपलाइन में गैस रिसाव ‘डिटेक्टर’ लगाने की भी सिफारिश की। यह प्रणाली रिसाव होने पर अलार्म बजा देती है और गैस आपूर्ति स्वतः बंद कर देती है। छोटी आग से निपटने के लिए हर किचन स्टेशन पर गीले तौलिये और ‘फायर ब्लैंकेट’ भी रखने की बात कही गई है।
बिजली सुरक्षा के लिए सीटीआई ने एमसीबी और ईएलसीबी लगाने की मांग की, ताकि शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड होने पर बिजली स्वतः कट जाए। साथ ही हर छह महीने में तारों की जांच कर पुराने तार, ढीले कनेक्शन और ओवरलोडेड सॉकेट की पहचान करने की सलाह दी गई।
डीप फ्रीजर, ओवन और एयर कंडीशनर जैसे भारी उपकरणों के लिए अलग बिजली लाइन होनी चाहिए और इन्हें एक्सटेंशन बोर्ड से नहीं चलाना चाहिए।
सीटीआई ने यह भी सुझाव दिया कि होटलों और रेस्तरां में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण हों, जिनमें नियमित अंतराल पर एबीसी टाइप अग्निशामक यंत्र, स्मोक डिटेक्टर और किचन, डाइनिंग एरिया, स्टोर और स्टाफ रूम में फायर अलार्म सिस्टम शामिल हों। राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार नए होटलों और बड़े रेस्तरां में स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य किया जाए।
संस्था ने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया और हर महीने ‘मॉक ड्रिल’ कराने की सिफारिश की जिसमें आग बुझाने, ग्राहकों को बाहर निकालने एवं आपात स्थिति में गैस आपूर्ति बंद करने का अभ्यास शामिल हो।
किचन में काम करने वालों को यह भी प्रशिक्षण दिया जाए कि तेल में लगी आग पर पानी न डालें, बल्कि ‘फायर ब्लैंकेट’ या गीले मोटे कपड़े से आग बुझाएं।
आपात निकासी के लिए सीटीआई ने सुझाव दिया कि हर प्रतिष्ठान में कम से कम दो साफ निकास मार्ग हों, ताकि मुख्य द्वार बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध रहे। साथ ही बैटरी बैकअप वाली इमरजेंसी लाइट, हर मंजिल पर हरे रंग के निकासी संकेत और आपात निकास को हमेशा खुला और सुलभ रखने की व्यवस्था हो।
संस्था ने दैनिक सुरक्षा मानक भी सुझाई, जिसमें दिन के अंत में मुख्य गैस वाल्व बंद करना, बिजली उपकरण बंद करना और रसोई में ज्वलनशील सामग्री को बिना निगरानी के न छोड़ना शामिल है।
गैस सिलेंडर हवादार स्थान पर रसोई से दूर रखे जाएं और परिसर में दो से अधिक अतिरिक्त सिलेंडर न रखे जाएं।
सीटीआई ने सभी प्रतिष्ठानों से अग्निशमन विभाग का एनओसी लेने और हर साल उसका नवीनीकरण कराने का आग्रह किया। साथ ही नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों के पालन को अनिवार्य बनाने की मांग की।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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