एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एजेंटिक एआई इंजीनियर की मांग 260 प्रतिशत बढ़ी: रिपोर्ट
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एजेंटिक एआई इंजीनियर की मांग 260 प्रतिशत बढ़ी: रिपोर्ट
मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) भारत में एजेंटिक एआई इंजीनियर की मांग 2026 में सालाना आधार पर 260 प्रतिशत बढ़ी है। यह उभरती प्रौद्योगिकी भूमिकाओं में सबसे तेज वृद्धि है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
मानव संसाधन समाधान प्रदाता सीआईईएल एचआर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनरेटिव एआई (जेनएआई) समाधान विकसित करने वाले और एआई उत्पाद प्रबंधकों की मांग में 120-120 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, एलएलएम इंजीनियर एवं एमएलऑप्स इंजीनियर की मांग क्रमशः 86.5 प्रतिशत और 82.2 प्रतिशत बढ़ी।
यह रिपोर्ट मार्च, 2024 से मई, 2026 के बीच 45 करोड़ से अधिक रोजगार विज्ञापनों, तीन करोड़ से अधिक पेशेवर प्रोफाइल और 10,000 से अधिक कौशल से जुड़े आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई नियमित तकनीकी कार्यों में काम के एक बड़े हिस्से को संभाल रहा है। टिकट समाधान और रिपोर्ट तैयार करने से जुड़े 70 प्रतिशत तक काम और टेस्ट केस तैयार करने के काम का 65 प्रतिशत तक हिस्सा एआई के जरिये किया जा रहा है।
इससे तकनीकी सहायता, रिपोर्ट तैयार करना और मानवीय गुणवत्ता जांच ऐसे कार्यों में शामिल हो गए हैं, जहां कार्य-स्तर पर स्वचालन की सबसे अधिक संभावना है। हालांकि, इन कार्यों का कुछ हिस्सा अब भी मानवीय हस्तक्षेप की मांग करता है।
सीआईईएल एचआर के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा, ‘‘एआई अलग-अलग प्रौद्योगिकी कौशल की उपयोगिता को बदल रहा है। नियमित गतिविधियां तेजी से स्वचालित हो रही हैं, जबकि वास्तविक कारोबारी माहौल में एआई का निर्माण, एकीकरण और प्रबंधन करने वाले लोगों की मांग बढ़ रही है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, बदलती मांग के बीच कंपनियां अपने आंतरिक प्रतिभा स्रोत को मजबूत कर रही हैं। आईटी सेवा कंपनियां एआई-केंद्रित प्रशिक्षण और नई भूमिकाओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार कर रही हैं।
इनमें क्लाउड अकादमी, प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाताओं के प्रमाणन कार्यक्रम, उद्यम एआई पहल और शुरुआती करियर वाले कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि जनरेटिव एआई इंजीनियरिंग, एआई/एमएल, क्लाउड इंजीनियरिंग, क्लाउड बदलाव, साइबर सुरक्षा, डेटा इंजीनियरिंग और स्वचालन ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जहां कंपनियां प्रतिभा विकसित करना चाहती हैं।
एआई, क्लाउड और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बाजार स्तर पर कौशल की कमी 38 से 61 प्रतिशत के बीच है। इससे कंपनियों के लिए बाहरी स्तर पर नियुक्तियों के साथ-साथ मौजूदा कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना भी जरूरी हो गया है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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