डिजिटल कनेक्टिविटी क्षेत्र में एक लाख करोड़ रुपये के सालाना कारोबार की संभावना: बीआईएफ

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डिजिटल कनेक्टिविटी क्षेत्र में एक लाख करोड़ रुपये के सालाना कारोबार की संभावना: बीआईएफ

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 09:21 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 09:21 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में करीब एक लाख करोड़ रुपये के सालाना कारोबार की संभावना है, जिसे काफी हद तक उपग्रह संचार (सैटकॉम) सेवाओं के जरिये हासिल किया जा सकता है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) के अध्यक्ष टी वी रामचंद्रन ने मंगलवार को यह अनुमान जताया।

रामचंद्रन ने ‘इंडिया सैटकॉम 2026’ सम्मेलन से इतर कहा कि भारतीय दूरसंचार नियामक ट्राई के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग अब भी ब्रॉडबैंड से नहीं जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में औसत प्रति उपयोगकर्ता राजस्व (एआरपीयू) कम होने के बावजूद मौजूदा अवसर कम-से-कम एक लाख करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार के हैं। उनके अनुसार, स्थलीय नेटवर्क नहीं पहुंचने के कारण ये लोग जुड़े नहीं हैं और उन्हें काफी हद तक उपग्रह संचार सेवाओं के जरिये जोड़ा जा सकता है।

रामचंद्रन ने कहा कि देश की 60 से 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है और उपग्रह संचार से जुड़े ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी) उपकरणों के जरिये खेतों से कृषि संबंधी आंकड़े जुटाने और उनकी निगरानी करने में मदद मिल सकती है। इससे कृषि का आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस सम्मेलन में दूरसंचार विभाग के सदस्य (वित्त) मनीष सिन्हा ने कहा कि दूरसंचार नेटवर्क का भविष्य केवल उपग्रह और स्थलीय नेटवर्क के बीच चुनाव का नहीं, बल्कि फाइबर, मोबाइल, वाई-फाई और उपग्रह संपर्क वाली एकीकृत व्यवस्था का है।

उन्होंने कहा कि उपग्रह स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, लॉजिस्टिक, विमानन, समुद्री सेवाओं और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में मदद कर सकते हैं तथा पारंपरिक नेटवर्क की मुश्किल पहुंच वाले इलाकों तक संपर्क पहुंचा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य कनेक्टिविटी को सस्ता, भरोसेमंद और हर समय उपलब्ध कराना है।

सिन्हा ने कहा कि दूरसंचार विभाग उपग्रहों के जरिये डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए अंतरिक्ष विभाग, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

सरकार ने एलन मस्क की स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब को भारत में सैटकॉम सेवाएं देने की अनुमति दी है। हालांकि, वाणिज्यिक सेवाएं शुरू करने से पहले इन कंपनियों को सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय