डीपीआईआईटी ने डिजाइन कानून में बदलाव के किए प्रस्ताव, टिप्पणियां मांगी

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डीपीआईआईटी ने डिजाइन कानून में बदलाव के किए प्रस्ताव, टिप्पणियां मांगी

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 02:23 PM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 02:23 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने मौजूदा डिजाइन कानून में बदलाव का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद इसे ऐसे समय अधिक प्रभावी बनाना है, जब नवाचार तेजी से डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी-संचालित हो रहा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इस विभाग ने कानून में प्रस्तावित बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक अवधारणा पत्र जारी किया है। इसने प्रस्तावित संशोधनों पर जनता से टिप्पणियां मांगी हैं।

मौजूदा कानूनी ढांचा इन बदलावों के अनुरूप नहीं हैं और इससे व्यवसायों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न होती है। साथ ही समकालीन नवाचार के साथ तालमेल बैठाने की कानून की क्षमता सीमित हो जाती है।

पत्र में कहा गया, ‘‘ इसलिए डिजाइन अधिनियम की प्रासंगिकता एवं प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए इसमें संशोधन आवश्यक हैं।’’

विभाग ने देश के डिजाइन अधिनियम 2000 में ‘वस्तु’ और ‘डिजाइन’ की परिभाषा में महत्वपूर्ण बदलाव करके डिजिटल डिजाइन को भी डिजाइन संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है। यह अधिनियम एक अत्यंत भिन्न औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी परिवेश में तैयार और लागू किया गया था।

इसमें कहा गया कि पहले डिजाइन संरक्षण भौतिक वस्तुओं और विनिर्माण एवं डिजाइन की पारंपरिक प्रक्रियाओं से गहराई से जुड़ा हुआ था। हालांकि अब, नवाचार मुख्य रूप से डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी संचालित है और आधुनिक डिजाइन पूरी तरह या आंशिक रूप से आभासी रूप में मौजूद हैं।

पत्र में कहा गया कि ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, आइकन, एनिमेटेड डिजाइन और स्क्रीन-आधारित डिजाइन वर्तमान में उपभोक्ता अनुभव के लिए मूलभूत हैं।

इस बदलाव ने डिजाइन कानून की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। अब संरक्षण का दायरा भौतिक स्वरूप से आगे बढ़कर डिजिटल और ‘इमर्सिव’ डिजाइन तक विस्तारित होना चाहिए।

इसमें कहा गया कि वर्तमान में डिजाइन संरक्षण शुरू में 10 वर्ष के लिए दिया जाता है जिसे नवीनीकरण अनुरोध दाखिल करने पर पांच वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है।

पत्र में कहा गया, ‘‘ भारत के कानून को ‘हेग समझौते’ के अनुच्छेद 17 के अनुरूप बनाने के लिए ‘5+5+5’ संरक्षण अवधि अपनाने का प्रस्ताव है। इससे डिजाइन मालिकों को डिजाइन के व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक होने पर ही संरक्षण बढ़ाने की सुविधा मिलेगी।

इसमें यह भी सुझाव दिया गया कि एक ही श्रेणी में आने वाले कई डिजाइन को एक ही डिजाइन आवेदन के तहत दाखिल करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि इससे आवेदकों के लिए दाखिल करने की लागत एवं प्रशासनिक प्रयास कम हो जाएंगे।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की 2025 की विश्व बौद्धिक संपदा संकेतक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में विश्व स्तर पर अनुमानित 12.2 लाख डिजाइन आवेदन दाखिल किए गए जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

भारत को केवल वर्ष 2024 में डिजाइन पंजीकरण के लिए 12,160 आवेदन प्राप्त हुए और वह वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान से सातवें स्थान पर पहुंच गया। इससे उसे शीर्ष 10 में स्थान मिला।

भाषा निहारिका रमण

रमण