ड्रेजिंग कॉरपोरेशन का अगले पांच साल में अपने कारोबार को 3,000 करोड़ रुपये पर पहुंचाने का लक्ष्य

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ड्रेजिंग कॉरपोरेशन का अगले पांच साल में अपने कारोबार को 3,000 करोड़ रुपये पर पहुंचाने का लक्ष्य

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 11:29 AM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 11:29 AM IST

(अभिषेक सोनकर)

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (डीसीआईएल ) ने अगले पांच साल में अपने कारोबार को दोगुना से ज्यादा करके 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना बनाई है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कैप्टन एस दिवाकर ने कहा कि कंपनी इस लक्ष्य को पाने के लिए नए बाजारों और क्षेत्रों को तलाश रही है।

विशाखापत्तनम की कंपनी ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड देश की सबसे बड़ी ‘ड्रेजिंग’ कंपनी है। इसके पास ड्रेजिंग परिचालन, समुद्री ढांचे और अंतर्देशीय जलमार्गों का करीब पांच दशक का अनुभव है। 29 मार्च को होने वाले कंपनी के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम से पहले पीटीआई-भाषा को दिए एक वीडियो साक्षात्कार में अधिकारी ने कहा, ‘‘हम देश की सबसे पुरानी ड्रेजिंग कंपनियों में से एक हैं। डीसीआईएल 2024-25 तक 1,148 करोड़ रुपये के कारोबार पर पहुंच गई है, जो 2015 के 550 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। हम इसे फिर से दोगुना करने की सोच रहे हैं। हम अगले 5-6 साल में 3,000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।’’

ड्रेजिंग एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो नदियों, झीलों, और समुद्रों के तल से गाद, रेत, और अन्य अवशेषों को हटाने के लिए की जाती है। यह प्रक्रिया जलमार्गों को साफ रखने, नौवहन को सुरक्षित बनाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

दिवाकर ने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए, डीसीआईएल नए रखरखाव ड्रेजिंग टेंडर, रिक्लेमेशन परियोजनाओं में हिस्सा लेगी और रणनीतिक भागीदारों के साथ नए बाजारों में उतरेगी। कंपनी बांध और जलाशय जैसे नए कारोबारी क्षेत्र में भी विविधीकरण पर भी विचार कर रही है।

स्वर्ण जयंती पर दिवाकर ने कहा कि बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल इस मौके पर मुख्य अतिथि होंगे। साथ ही राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर और पोत परिवहन सचिव विजय कुमार और विशाखापत्तनम बंदरगाह प्राधिकरण के चेयरमैन भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे।

कंपनी की वृद्धि में मदद करने वाले कारकों के बारे में सीईओ ने कहा कि देश में ड्रेजिंग गतिविधियों का दायरा काफी बढ़ने वाला है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समुद्री क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसका मकसद भारत को पोत परिवहन उद्योग का वैश्विक केंद्र बनाना है। सागरमाला कार्यक्रम और तटीय आर्थिक क्षेत्र जैसे उपायों से तटीय पोत परिवहन, ट्रांसशिपमेंट केंद्र के विकास और अंतर्देशीय जलमार्ग के एकीकरण के मौके मिल रहे हैं।

दिवाकर ने कहा कि कंपनी देश में आने वाली कई विशाल बंदरगाह परियोजनाओं में ड्रेजिंग काम के मौकों पर नजर रख रही है। इनमें तूतीकोरिन में वीओसी बंदरगाह पर 15,000 करोड़ रुपये का आउटर हार्बर, कोचीन बंदरगाह प्राधिकरण का आउटर हार्बर, पल्टा (पश्चिम बंगाल) में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह प्राधिकरण, पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (ओडिशा) आदि शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की और ड्रेजिंग गतिविधियों में हिस्सा लेने पर विचार कर रही है।

भाषा अजय अजय

अजय